Microsoft Ai Agents: माइक्रोसॉफ्ट का मानना है कि कंप्यूटिंग के अगले दौर में ऑपरेटिंग सिस्टम और ऐप्स की जरूरत खत्म हो जाएगी और इनकी जगह AI Agents ले लेंगे. कंपनी की डेवलपर कॉन्फ्रेंस में सीईओ सत्य नडेला ने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट अब ऐप्स और डिवाइसेस पर आधारित दुनिया से दूर उस दिशा में जा रही है, जहां एआई एजेंट्स ही लोगों और कंप्यूटर के बीच प्राइमरी इंटरफेस बन जाएंगे. माइक्रोसॉफ्ट ने कहा कि एआई एजेंट्स अब सिर्फ ऐप्स में इम्बेड होने वाले असिस्टेंट नहीं रहे हैं और वो सॉफ्टवेयर, डिवाइसेस और वर्कफ्लो में भी काम कर सकते हैं. इससे भविष्य के कंप्यूटर बनाने और यूज करने का पूरा तरीका बदल जाएगा.

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क्या होते हैं एआई एजेंट्स?

एआई एजेंट्स ऐसे सॉफ्टवेयर सिस्टम होते हैं, जो यूजर की कमांड पर एआई की मदद से किसी टास्क को पूरा करते हैं. इनमें रीजनिंग, प्लानिंग और मेमोरी की कैपेबिलिटीज होती हैं और ये खुद से सीखकर अपने डिसीजन खुद ले सकते हैं. 

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माइक्रोसॉफ्ट ने पेश किया Project Solara

नडेला का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब माइक्रोसॉफ्ट ने क्वालकॉम के साथ मिलकर Project Solara शुरू किया है. यह एक चिप-टू-क्लाउड प्लेटफॉर्म है, जिसे 'एजेंट-फर्स्ट कंप्यूटिंग' के लिए डिजाइन किया गया है. दरअसल, माइक्रोसॉफ्ट का मानना है कि टेक्नोलॉजी के साथ इंटरेक्ट करने के लिए एआई एजेंट लोगों की पहली पसंद बनने वाले हैं. किसी ऐप को ओपन कर मैनुअली टास्क करने की बजाय लोग अलग-अलग ऐप्स, डिवाइस और सर्विस में काम करने वाले एआई एजेंट्स से अपने टास्क पूरे करवाएंगे. Project Solara हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और एज्योर क्लाउड सर्विस को कंबाइन कर एजेंट-फर्स्ट एक्सपीरियंस देगा.

एआई एजेंट्स का है फ्यूचर- माइक्रोसॉफ्ट

माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि कंप्यूटिंग लगातार इवॉल्व होती आई है. यह मेनफ्रेम्स कंप्यूटर से पर्सनल कंप्यूटर पर आई और फिर स्मार्टफोन और वीयरेबल गैजेट देखने को मिले. हर जनरेशन के साथ टेक्नोलॉजी यूजर के और पास पहुंचती जा रही है. अब अगला दौर एआई एजेंट का होगा. इसमें लोग बिना ऐप्स, मेनू और इंटरफेस के अपनी नैचुरल लैंग्वेज में कंप्यूटर के साथ कम्युनिकेट कर पाएंगे.

बाकी कंपनियां भी कर रही हैं तैयारी

एआई एजेंट्स पर काम करने वाली माइक्रोसॉफ्ट अकेली कंपनी नहीं है. OpenAI भी इस दिशा में काम कर रही है और उसने एआई एजेंट्स वाला फोन लाने का भी ऐलान कर दिया है. इसमें कोई ऐप्स नहीं होगी और यह पूरी तरह एआई एजेंट के सहारे काम करेगा. हर काम के लिए अलग ऐप ओपन करने की बजाय यह फोन समझ जाएगा कि यूजर को क्या करना है. यूजर के प्रॉम्प्ट देते ही फोन उस टास्क को पूरा कर देगा. 

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