मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतों के कारण स्मार्टफोन के बाद अब लैपटॉप भी महंगे होने लगे हैं. लेनोवो ने ऐलान किया है कि कुछ मार्केट्स के लिए उसने अपने पीसी महंगे कर दिए हैं. साथ ही कंपनी ने चेतावनी दी है कि मेमोरी चिप्स की कमी जल्द पूरी होने वाली नहीं है और इसका असर लंबे समय तक जारी रहेगा. इससे कीमतें बढ़ने के साथ-साथ अवैलेबिलिटी पर भी असर पड़ सकता है. बता दें कि सैमसंग और शाओमी जैसी कंपनियां भी इसी कारण अपने स्मार्टफोन महंगे कर चुकी हैं.

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लेनोवो ने क्यों बढ़ाए दाम?

लेनोवो का कहना है कि महंगी होती मेमोरी चिप्स के कारण पीसी बिजनेस पर बुरा असर पड़ रहा है. अब मेमोरी चिप्स खरीदना और कीमतों में अस्थिरता के कारण प्रोडक्शन की प्लानिंग करना मुश्किल हो गया है. लेनोवो ने मेमोरी शॉर्टेज के बीच खुद को सेफ रखने के लिए एडवांस में मेमोरी चिप्स और दूसरे जरूरी कंपोनेंट खरीद लिए थे, जिससे कंपनी के पास दूसरों की तुलना में ज्यादा इन्वेंट्री थी. इससे कंपनी का प्रोडक्शन जारी रहा, लेकिन यह शॉर्टेज के जारी रहने पर यह तरीका भी लेनोवो के काम नहीं आएगा. लेनोवो की तरह इंटेल के सीईओ भी कह चुके हैं कि मेमोरी शॉर्टेज का असर लंबे समय तक रहेगा और इस मामले में जल्दी राहत मिलने के आसान नहीं हैं. 

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क्यों हो रही मेमोरी चिप्स की शॉर्टेज?

अगर यह कहा जाए कि एआई बूम के कारण स्मार्टफोन और लैपटॉप की कीमतें बढ़ रही हैं तो गलत नहीं होगा. मेमोरी चिप्स बनाने वाली कई कंपनियों ने अब कंज्यूमर मार्केट की जगह एआई सर्वर और डेटा सेंटर के लिए चिप बनाना शुरू कर दिया है. यहां चिप की डिमांड ज्यादा है और कंपनियों के मार्जिन भी बड़ा है. इसलिए अब कंज्यूमर के लिए चिप की कमी होने लगी हैं. इसके अलावा दूसरे कई कंपोनेंट भी महंगे हो रहे हैं, जिसके चलते कंपनियों की लागत बढ़ रही है. 

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