Tech Tips: टेक्नोलॉजी की दुनिया में नए-नए डिवाइस लोगों की जरूरत बन चुके हैं. आज सिर्फ स्मार्टफोन ही नहीं बल्कि लैपटॉप, स्मार्टवॉच, टैबलेट ने भी लोगों के जीवन में अपनी एक जगह बना ली है. पढ़ाई से लेकर ऑफिस के काम तक, लोग अब इन डिवाइसों का ही इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, इन डिवाइस के सामने कई घंटों गुजारने से लोगों की आंखों पर भी बुरा असर पड़ता है.

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दरअसल, इन डिवाइसों से ब्लू लाइट निकलती है जो लोगों के आंखों के लिए सही नहीं होती है. इसीलिए मार्केट में ब्लू लाइट स्क्रीन प्रोटेक्टर आ चुका है जिसकी बाजार में काफी चर्चा हो रही है. आइए जानते हैं कि ये स्क्रीन प्रोटेक्टर किस टेक्नोलॉजी पर काम करता है.

क्या होती है ब्लू लाइट

जानकारी के अनुसार, ब्लू लाइट दिखाई देने वाली रोशनी का ही एक हिस्सा है जिसकी वेवलेंथ काफी कम होती है और इसमें एनर्जी ज्यादा होती है. सूरज की रोशनी इसका नैचुरल सोर्स होता है जबकि स्मार्टफोन, लैपटॉप, टीवी और दूसरे डिजिटल डिस्प्ले से भी कुछ मात्रा में ब्लू लाइट निकलती है.

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हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट अपने आप में आंखों के लिए खतरनाक है. समस्या अक्सर लंबे समय तक स्क्रीन देखने, कम पलक झपकाने, गलत ब्राइटनेस और खराब स्क्रीन-यूजिंग आदतों से जुड़ी होती है.

कैसे काम करता है ब्लू लाइट स्क्रीन प्रोटेक्टर

आपको बता दें कि ब्लू लाइट स्क्रीन प्रोटेक्टर एक तरह की फिल्म या टेम्पर्ड ग्लास होता है जिसे स्क्रीन के ऊपर लगाया जाता है. इसमें ऐसी लेयर या कोटिंग की जाती है जो ब्लू स्पेक्ट्रम की रोशनी को फिल्टर करने का दावा करती है.

लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना चाहिए कि हर ब्लू लाइट स्क्रीन प्रोटेक्टर समान नहीं होता है. अलग-अलग प्रोडक्ट अलग लेवल में ब्लू लाइट फिल्टर करते हैं. इसलिए केवल पैकेजिंग पर लिखे Blue Light Protection दावे को देखकर किसी डिवाइस को खरीदना सही नहीं माना जाता है.

खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप ब्लू लाइट स्क्रीन प्रोटेक्टर खरीदने की सोच रहे हैं तो सिर्फ ब्लू लाइट ब्लॉक लिखे होने से फैसला न लें. इसकी जगह पर प्रोडक्ट की जानकारी में ये देखें कि कंपनी कितनी ब्लू लाइट फिल्टर करने का दावा कर रही है. इसके साथ ही स्क्रीन प्रोटेक्टर का किस तरह से टेस्ट हुआ है.

साथ ही प्रोटेक्टर की क्लैरिटी, टच रिस्पॉन्स, ग्लेयर रिडक्शन और फिटिंग भी जरूरी होता हैं. बहुत ज्यादा टिंट वाला प्रोटेक्टर स्क्रीन के रंगों को बदल सकता है जो फोटो या वीडियो एडिटिंग करने वालों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है.

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