जैसे-जैसे सर्दियां नजदीक आने लगती हैं वैसे ही घरों में गर्म पानी की जरूरत महसूस होने लगती है. नहाने से लेकर बर्तन धोने तक, हर काम के लिए लोगों को गर्म पानी चाहिए होता है. इसके लिए ज्यादातर घरों में इलेक्ट्रिक गीजर का सहारा लिया जाता हैं. आम तौर पर आपने नॉर्मल गीजर देखे होंगे जिनमें एक मेटल की रॉड या हीटिंग एलिमेंट लगा होता है जो सीधे पानी के संपर्क में रहकर उसे गर्म करता है. 

Continues below advertisement

लेकिन अब वॉटर हीटर की दुनिया में एक बिल्कुल नई तकनीक आ चुकी है. जिसे इंडक्शन गीजर कहा जाता है. यह नया गैजेट टेक्नोलॉजी के मामले में पुराने सभी तरीकों से काफी हटकर है. यह सामान्य गीजर की तुलना में न सिर्फ ज्यादा मार्डन है. बल्कि पानी गर्म करने के तौर-तरीकों को भी पूरी तरह से बदल देता है. चलिए आपको बताते हैं कि यह नया इंडक्शन गीजर आखिर आम गीजर से किस तरह अलग है और यह तकनीक कैसे करती है काम.

कैसे काम करता है यह नया इंडक्शन गीजर सिस्टम?

इंडक्शन गीजर के काम करने का तरीका ठीक उसी तरह है जैसे आजकल घरों में इस्तेमाल होने वाला इंडक्शन चूल्हा काम करता है. इस नए सिस्टम में नार्मल गीजर की तरह कोई भी हीटिंग रॉड सीधे पानी के अंदर डूबी हुई नहीं होती है. इसके बजाय इस तकनीक में कॉइल्स के जरिए एक मजबूत इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड तैयार किया जाता है. इस पूरी प्रोसेस के दौरान मैग्नेटिक एनर्जी की मदद से इसका Internal Heating System बहुत कम समय में गर्म होता है.

Continues below advertisement

और उस गर्मी को बहुत ही शानदार तरीके से पानी तक पहुंचाया जाता है. इस पूरे सेटअप में जनरेटर यूनिट, वाटर स्टोरेज टैंक और टेंपरेचर को कंट्रोल करने के लिए मार्डन डिजिटल यूनिट्स शामिल होती हैं. बिना किसी पुराने हीटिंग एलिमेंट के पानी को तेजी से गर्म करने की यह प्रोसेस काफी असरदार है. 

नॉर्मल गीजर से कितना अलग और सेफ है यह?

पारंपरिक इलेक्ट्रिक गीजर और इस नए इंडक्शन गीजर के बीच सबसे बड़ा अंतर इनके हीटिंग डिजाइन का होता है. पुराने गीजर में हीटिंग एलिमेंट हमेशा पानी के काॅन्टेक्ट में रहता है. जिसकी वजह से पानी में मौजूद मिनरल्स और कैल्शियम समय के साथ उस पर जम जाते हैं जिसे स्केलिंग कहा जाता है. इससे गीजर की हीटिंग कैपेसिटी कम हो जाती है और बिजली का बिल भी फालतू में बढ़ने लगता है. 

इसके उलट इंडक्शन गीजर में पानी के सीधे काॅन्टेक्ट में कोई भी बिजली वाला हीटिंग पार्ट नहीं होता है. पानी के सीधे काॅन्टेक्ट में रॉड न होने की वजह से इसमें शॉर्ट सर्किट और करंट लगने का खतरा पुराने गीजर के मुकाबले काफी हद तक कम हो जाता है. हालांकि फिर भी किसी भी भारी इलेक्ट्रिक उपकरण की तरह इसकी सही वायरिंग और सेफ्टी फीचर्स की जांच करवाना बेहद जरूरी होता है जिससे सर्दियों के मौसम में किसी भी अनहोनी से पूरी तरह बचा जा सके.

यह भी पढ़ें: क्यों एंड्रॉयड और IOS पर ही चलते हैं सभी फोन, दूसरी कंपनी क्यों नहीं डालती इसमें हाथ?

क्या इससे बिजली की बचत और तेजी से गर्म होता है पानी?

जब भी कोई नया इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बाजार में आता है. तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या इससे बिजली की बचत होगी या नहीं? जानकारों का मानना है कि इंडक्शन टेक्नालाॅजी की वर्किंग कैपेसिटी पारंपरिक हीटिंग सिस्टम से बेहतर होती है क्योंकि इसमें मैग्नेटिक इंडक्शन के जरिए एक साथ तेजी से हीट ट्रांसफर होती है. पानी बहुत कम समय में नहाने लायक गर्म हो जाता है.

जिससे ज्यादा देर तक इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ती. हालांकि बिजली की कुल बचत इस बात पर भी निर्भर करती है कि आप किस ब्रांड का मॉडल इस्तेमाल कर रहे हैं और उसकी कैपेसिटी कितनी है. अगर इस सर्दी आप भी अपने घर के पुराने गीजर से परेशान हो चुके हैं और कोई नया वॉटर हीटर खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं तो आप  इस इस इंडक्शन तकनीक के बारे में जरूर सोच सकते हैं.

यह भी पढ़ें: इलेक्ट्रिक बसों को चार्ज करेगी सड़क, नहीं पड़ेगी केबल की जरूरत