How Much RAM is Required In Phone: कुछ साल पहले तक फोन में 4GB रैम को काफी समझा जाता था. 6GB और 8GB का मतलब था कि फोन में कुछ भी किया जा सकता है, लेकिन अब चीजें बदल गई हैं और खासकर ऑन-डिवाइस एआई फीचर्स आने के बाद रैम की जरूरत भी बढ़ गई है. यही कारण है कि अब कंपनियां 12 और 16GB तक की रैम वाले मॉडल लॉन्च करने लगी हैं. आज हम जानेंगे कि फोन में रैम की जरूरत क्यों होती है और अगर आप अब नया फोन ले रहे हैं तो उसमें कम से कम कितनी रैम होनी चाहिए.

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फोन में क्यों पड़ती है रैम की जरूरत?

RAM यानी रैंडम मेमोरी एक्सेस. यह फोन का टेंपरेरी वर्कस्पेस होता है. फोन में खुलीं ऐप्स, टैब्स और सारी प्रोसेस रैम पर ही रन करती हैं. ज्यादा रैम होने का मतलब है कि आप फोन में एक साथ ज्यादा ऐप्स और प्रोसेस ओपन कर सकते हैं. यानी ज्यादा रैम होने पर मल्टीटास्किंग आसान हो जाती है. रैम टेंपरेरी तौर पर उतना ही डेटा होल्ड करती है, जितना ऑपरेटिंग सिस्टम और फोन में ओपन ऐप को जरूरत है. फोन ऑफ होने पर रैम का डेटा इरेज हो जाता है.

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फोन में कितनी रैम होनी चाहिए?

अगर आप नया फोन ले रहे हैं और इसे बेसिक टास्क के लिए यूज करना चाहते हैं तो कम से कम 8GB वाले ऑप्शन को चुनें. इससे ऐप्स रन करने, फोटो लेने और मल्टीटास्किंग में फोन अटकेगा नहीं. अब फुल एंड्रॉयड सर्विस के लिए भी रैम की रिक्वायरमेंट कम से कम 6GB हो गई है. इसलिए थोड़ा ज्यादा स्पेस ही ठीक रहता है, लेकिन अगर आप एआई फीचर्स यूज करना चाहते हैं तो आपको ज्यादा रैम की जरूरत पड़ेगी. अगर आप एंड्रॉयड फोन यूज कर रहे हैं तो हो सकता है कि 12GB रैम भी आपके लिए कम पड़े. ऐसा इसलिए क्योंकि गूगल के जेमिनी इंटेलीजेंस के लिए कम से कम 12GB रैम और लेटेस्ट प्रोसेसर होना जरूरी है. जेमिनी इंटेलीजेंस के फीचर ऑन-डिवाइस प्रोसेस कंप्लीट करते हैं, इसलिए ज्यादा रैम की जरूरत है. 

आईफोन का क्या हाल है?

ऐप्पल भी पिछले कुछ सालों से धीरे-धीरे रैम में इजाफा कर रही है. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि iPhone 18 Pro Max को 12GB रैम के साथ लॉन्च किया जा सकता है. अगर ऐप्पल इंटेलीजेंस की बात करें तो इसे 8GB रैम की जरूरत पड़ती है.

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