Google Maps: गूगल मैप्स का आज ज्यादातर लोग इस्तेमाल करते हैं. जगह खोजने से लेकर पैट्रोल पंप खोजने तक आज गूगल मैप का इस्तेमाल काफी बढ़ चुका है. लेकिन क्या आपने सोचा है कि गूगल मैप्स पर कैसे जगहों के नाम दिखते हैं. आखिर गूगल मैप को इसकी जानकारी कहां से मिलती है. आइए जानते हैं क्या होता है इसका पूरा प्रोसेस.
कहां से मिलती है जानकारी
आपको बता दें कि Google Maps पर दिखने वाली जानकारी किसी एक जगह से नहीं आती. इसके लिए Google कई अलग-अलग सोर्सेज का इस्तेमाल करता है. इनमें लोकल बिजनेस, सरकारी रिकॉर्ड, मैपिंग पार्टनर्स, वेबसाइट्स और खुद Google के सर्वे शामिल होते हैं. इन सभी जगहों से मिली जानकारी को मिलाकर Maps पर अपडेट किया जाता है.
बिजनेस वाले अपने आप जोड़ सकते हैं नाम
अब आपको बता दें कि अगर किसी व्यक्ति का नया बिजनेस है तो वह Google Business Profile के जरिए अपनी दुकान, ऑफिस या संस्थान की जानकारी खुद दर्ज कर सकता है. इसमें पता, फोन नंबर, वेबसाइट, काम करने का समय और फोटो जैसी जानकारी शामिल की जाती है. वेरिफिकेशन प्रोसेस के बाद ये जानकारी Google Maps पर दिखाई देने लगती है.
यूजर्स भी दे सकते हैं जानकारी
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Google Maps की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसमें आम लोग भी योगदान दे सकते हैं. अगर किसी नई दुकान, सड़क या किसी स्थान का नाम Maps पर नहीं दिख रहा है तो यूजर Add a Place या Suggest an Edit फीचर की मदद से जानकारी भेज सकता है. बता दें कि यूजर से मिली जानकारी के बाद गूगल उसको पहले चेक करता है और सही पाए जाने पर गूगल उससे मैप में जोड़ देता है.
कई स्तर पर होती है जानकारी की जांच
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Google Maps पर कोई भी जानकारी डायरेक्ट नहीं जुड़ जाते हैं. दरअसल, Google अपने एल्गोरिदम, मशीन लर्निंग और ह्यूमन वेरिफिकेशन की मदद से जानकारी को वेरिफाई किया जाता है. अगर कई सोर्सेज एक जैसी जानकारी देते हैं तो उसके सही होने की संभावना ज्यादा होती है. इसके अलावा अगर जानकारी गलत पाई जाती है तो उसे मैप से हटा भी दिया जाता है. इसी तरह से गूगल मैप पर जानकारी को ऐड करना आसान है लेकिन इसकी पीछे भी पूरा लंबा वेरिफिकेशन प्रोसेस होता है जिसे गूगल खुद चेक करता है.
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