Plane Radar System: जब भी किसी विमान हादसे की खबर आती है तो एक सवाल सबसे पहले उठता है क्या प्लेन रडार से गायब हो गया था? आमतौर पर यात्रियों को लगता है कि रडार से गायब होना मतलब प्लेन का अचानक लापता हो जाना लेकिन असल में इसके पीछे कई तकनीकी कारण हो सकते हैं.

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रडार सिस्टम कैसे करता है प्लेन को ट्रैक

एयर ट्रैफिक कंट्रोल विमान को ट्रैक करने के लिए दो तरह के रडार का इस्तेमाल करता है. प्राइमरी रडार प्लेन से टकराकर लौटने वाले सिग्नल से उसकी लोकेशन बताता है जबकि सेकेंडरी रडार प्लेन में लगे ट्रांसपोंडर से मिलने वाले सिग्नल पर काम करता है. अधिकतर मामलों में अगर ट्रांसपोंडर काम करना बंद कर दे तो प्लेन सेकेंडरी रडार से गायब हो सकता है.

ट्रांसपोंडर फेल होना सबसे बड़ी वजह

विमान का ट्रांसपोंडर उसकी पहचान, ऊंचाई और स्पीड जैसी जानकारी कंट्रोल रूम तक भेजता है. तकनीकी खराबी, पावर फेल्योर या आग लगने जैसी स्थिति में यह सिस्टम बंद हो सकता है. ऐसे में प्लेन रडार स्क्रीन से अचानक गायब दिखने लगता है जबकि वह हवा में मौजूद होता है.

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मौसम और वातावरण भी बन सकता है कारण

भयंकर तूफान, भारी बारिश, बिजली गिरना या सोलर एक्टिविटी जैसी स्थितियां भी रडार सिग्नल को प्रभावित कर सकती हैं. कुछ इलाकों में भौगोलिक वजहों से भी रडार कवरेज कमजोर हो जाती है खासकर समुद्र के ऊपर उड़ते समय.

नेविगेशन सिस्टम में गड़बड़ी से बढ़ता है खतरा

अगर प्लेन के नेविगेशन सिस्टम गलत डेटा दिखाने लगें तो पायलट को सही दिशा और ऊंचाई का अंदाजा नहीं रहता. गलत सेंसर रीडिंग की वजह से गलत फैसले लिए जा सकते हैं जो हादसे का कारण बन सकते हैं.

क्या जानबूझकर रडार से गायब किया जा सकता है प्लेन?

कुछ दुर्लभ मामलों में मानवीय गलती या जानबूझकर सिस्टम बंद करने से भी प्लेन रडार से ओझल हो सकता है. हालांकि आधुनिक विमानों में ऐसे सिस्टम लगाए जाते हैं जो किसी भी असामान्य गतिविधि की तुरंत सूचना देते हैं. प्लेन का रडार से गायब होना हमेशा रहस्य नहीं होता, बल्कि इसके पीछे ट्रांसपोंडर फेल्योर, मौसम, तकनीकी खराबी या कवरेज की सीमाएं हो सकती हैं.

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