आज स्मार्टवॉच सिर्फ समय देखने वाली डिवाइस नहीं रह गई है. एडवांस स्मार्टवॉच में कई सारे फीचर्स देखने को मिल जाते हैं जो यूजर्स के लिए काफी फायदेमंद साबित होते हैं. हार्ट रेट, कदमों की संख्या, नींद, एक्सरसाइज, कैलोरी और यहां तक कि रिकवरी जैसी कई जानकारियां भी ये आपकी कलाई पर दिखाती है. लेकिन स्क्रीन पर दिखाई देने वाला हर नंबर शरीर से सीधे मापा गया आंकड़ा हो ये जरूरी नहीं होता है.

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कई आंकड़े होते हैं सिर्फ अनुमान

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के शोधकर्ताओं के मुताबिक, स्मार्टवॉच से मिलने वाले कई हेल्थ डेटा असली में सेंसर से मिले संकेतों और कंप्यूटर एल्गोरिदम की मदद से तैयार किया गया अंदाजा होता है.

वैज्ञानिकों ने बताया कि लोगों को ये समझना जरूरी है कि घड़ी कौन-सी चीज सीधे माप रही है और किन रिजल्ट्स को अलग-अलग डेटा के आधार पर कैलकुलेट किया जा रहा है. इस स्टडी का कंल्यूजन Sensors जर्नल में पब्लिश हुए हैं.

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सेंसर कैसे जुटाते हैं जानकारी?

आपको बता दें कि स्मार्टवॉच में मौजूद अलग-अलग सेंसर शरीर और आसपास के वातावरण से संकेत लेते हैं. जैसे ऑप्टिकल सेंसर स्किन पर रोशनी डालकर कलाई में ब्लड फ्लो से जुड़े बदलावों को पहचानते हैं. इसी डेटा के आधार पर हार्ट रेट का अनुमान लगाया जाता है.

इसी तरह मोशन सेंसर शरीर की एक्टिविटी को पहचानते हैं जबकि GPS बाहर चलते या दौड़ते समय दूरी, स्थान और स्पीड जैसी जानकारी देता है. इसके बाद घड़ी का सॉफ्टवेयर इन संकेतों को प्रोसेस करके स्क्रीन पर अलग-अलग आंकड़े दिखाता है.

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कौन-से आंकड़ों पर ज्यादा भरोसा?

हर स्मार्टवॉच फीचर की सटीकता एक जैसी नहीं होती है. नॉर्मली यूजर के आराम करने की कंडिशन में हार्ट रेट, लगातार एक्सरसाइज के दौरान हार्ट रेट, स्टेप काउंट और बाहर की एक्टिविटी की स्पीड जैसे सरल आंकड़े ज्यादा भरोसेमंद हो सकते हैं.

इसके मुकाबले कैलोरी बर्न, नींद के अलग-अलग लेवल, शरीर में पानी की मात्रा, रिकवरी और बॉडी कंपोजिशन जैसे मुश्किल रिजल्ट्स कई तरह के डेटा और अनुमान पर निर्भर करते हैं. इसलिए इन्हें बिल्कुल सटीक मान लेना सही नहीं होता है.

एक ही व्यक्ति को अलग-अलग नंबर क्यों मिलते हैं?

दरअसल, स्मार्टवॉच की रीडिंग पर कई बाहरी चीजों का असर पड़ सकता है. घड़ी का ढीला होना, ज्यादा हाथ हिलाना, पसीना, टेंपरेचर, टैटू, स्किन का रंग और शरीर की बनावट जैसी परिस्थितियां सेंसर के रिजल्ट्स को प्रभावित कर सकती हैं.

इसके अलावा अलग-अलग कंपनियां अलग सेंसर, टेक्नोलॉजी और अपने पर्सनल एल्गोरिदम इस्तेमाल करती हैं. इसी वजह से दो ब्रांड की घड़ियां एक ही व्यक्ति के लिए अलग-अलग आंकड़े दिखा सकती हैं.

ट्रेंड पर रखनी चाहिए नजर

वैज्ञानिकों के अनुसार, स्मार्टवॉच का सबसे अच्छा इस्तेमाल लंबे समय के बदलावों को समझने के लिए किया जाता है. जैसे एक दिन हार्ट रेट नॉर्मल से थोड़ा अलग दिखने के बजाय कई दिनों या हफ्तों में लगातार हो रहा बदलाव ज्यादा जरूरी होता है. इसी तरह नींद, रोजाना की एक्टिविटी या आराम की कंडिशन में हार्ट रेट के पैटर्न को लंबे समय तक देखना ज्यादा कारगर साबित होता है.

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