How Smartphones Are Made: आज के दौर में मोबाइल फोन एक सबकी जरूरत बन गई है. किसी को फोन करके तुरंत जानकारी लेनी हो या फिर कहीं पेमेंट करना हो, हर काम मिनटों में ही हो जाता है. ऐसे में क्या आपने सोचा है कि जो स्मार्टफोन आप यूज कर रहे हैं, उस एक स्मार्टफोन को बनाने में कितना समय लगता है और वह कैसे फैक्ट्री में बनाया जाता है? आपको जानकर हैरानी होगी कि 60 से भी ज्यादा अलग-अलग पार्ट्स से मिलकर एक स्मार्टफोन तैयार होता है. अधिकतम लोगों को इस बात की जानकारी नहीं होती है, ऐसे में आइए आपको बताते हैं कैसे एक स्मार्टफोन फैक्ट्री में बनकर तैयार होता है. 

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पहले होती है सोच और डिजाइन

किसी भी फोन को बनाने से पहले कंपनी के इंजीनियर्स और डिजाइनर्स पुराने एक्सिस्टिंग मॉडल्स को देखकर उसमें कमियां निकालते हैं और फिर नए फोन को बनाने का डिजाइन तैयार करते हैं.  इसमें वे हर चीज ट्राई करते हैं, जैसे कि फोन के गिरने पर वह कितना टूटेगा, कहां से क्रैक आएगा, कितने टेम्परेचर तक वह गर्मी झेलेगा.  ये पूरी चीजें फोन के बनने से पहले ही कंप्यूटर पर की जाती हैं.

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फैक्ट्री में कैसे तैयार होता है फोन?

बहुत कम लोगों को पता होगा कि एक स्मार्टफोन को बनाने में कम से कम 60 से भी ज्यादा पार्ट्स को एक साथ जोड़ा जाता है. यह जानकर हैरानी होगी कि एक छोटे से फोन में इतनी सारी चीजें कैसे फिट की जाती होंगी. बता दें कि इसे बनाने के वक्त सबसे पहले मदरबोर्ड को तैयार किया जाता है, जिस पर सारे पार्ट्स लगाए जाते हैं.  फिर स्क्रीन लगाई जाती है, उसके बाद बाकी की जरूरी चीजें लगाई जाती हैं, जैसे कैमरा, बैटरी और अन्य हिस्सों को एक साथ जोड़ा जाता है. अंत में इसमें कॉलिंग, मैसेज, वीडियो कॉल, ब्लूटूथ, वाई-फाई और इंटरनेट जैसे फीचर्स पर काम किया जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, ये सारे पार्ट्स दुनिया भर के कई कोनों से मंगाए जाते हैं.  फिर सभी को मशीनों की मदद से जोड़ा जाता है. वे बताते हैं कि एक स्मार्टफोन बनाने में कम से कम महीनों का समय लग जाता है.  इसमें कई वर्कर्स की मेहनत और जुनून जुड़ा होता है. 

आखिरी, लेकिन सबसे जरूरी कदम

मोबाइल फोन को बनाने के लिए सिर्फ पार्ट्स को जोड़ना ही काफी नहीं होता है. इसमें सबसे जरूरी कदम होता है बनाए गए फोन को टेस्ट करना, कि वह सही से काम कर रहा है या नहीं, यूजर फ्रेंडली है या नहीं, और जिन कमियों को पूरा करने के लिए उसे बनाया गया था, वह वास्तव में सफल हुआ है या नहीं. इस दौरान बनाए गए स्मार्टफोन्स की हर स्तर पर टेस्टिंग होती है, जैसे उसे गिराकर देखना, किस तरफ से गिरने पर फोन में ज्यादा स्क्रैच आ रहा है, इसके अलावा फोन की बैटरी हेल्थ कितनी है, फोन में इंटरनेट और वाई-फाई अच्छी तरह काम कर रहा है या नहीं, स्क्रीन क्विक रिस्पॉन्स कर रही है या नहीं. ऐसी सभी चीजें हर स्तर पर जांची जाती हैं. 

स्मार्टफोन के टेस्टिंग प्रोसेस से गुजरने के बाद ही उसमें सॉफ्टवेयर डाला जाता है और वह पैकेजिंग के लिए जाता है. पैकिंग के दौरान इस बात का ध्यान रखा जाता है कि फोन के साथ उसकी जरूरी चीजें भी दी जाएं, जैसे उसका चार्जर और उसे इस्तेमाल करने की गाइडलाइंस. फिर सभी चीजों को अच्छी तरह पैक करने के बाद ही उसे बाजार में उतारा जाता है. 

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