New Rule on VPN: आज के डिजिटल समय में वीपीएन यानी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क काफी तेजी से चर्चा में आया है. बता दें कि अक्सर, सरकार किसी ऐप या वेबसाइट पर बैन लगाती है तो अक्सर लोग उसे वीपीएन की मदद से एक्सेस करने लगते हैं. इसी को लेकर अब सरकार वीपीएन को लेकर सख्त नियम बनाने की ओर कदम बढ़ा रही है. रिपोर्ट के अनुसार, जल्द ही सरकार वीपीएन पर नए नियम लागू कर सकती है जिससे कंपनियों को देश में अपनी मौजूदगी सुनिश्चित करनी पड़ेगी. आइए जानते हैं कि नए नियम से कैसे लोगों पर पड़ेगा असर.

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क्यों बन रहे नए नियम

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार का मानना है कि वर्ष 2022 में भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) द्वारा जारी किए गए नियम वैसे रिजल्ट्स नहीं दे पाए जैसा उनसे उम्मीद की गई थी. पिछले नियमों के मुताबिक, VPN कंपनियों को अपने ग्राहकों से जुड़ी कई जानकारियां सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया था लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इससे VPN सेवाओं के इस्तेमाल पर कंट्रोल नहीं हो पाया था.

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, आज ज्यादातर लोग VPN की मदद से उन वेबसाइटों, ऐप्स और ऑनलाइन सर्विसों तक पहुंच रहे हैं जिन्हें सरकार बैन करती है.

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कैसे काम करता है VPN

आपको बता दें कि VPN के काम करने का तरीका काफी अलग है. दरअसल, ये यूजर्स के असली IP Address को छिपाकर इंटरनेट ट्रैफिक को दूसरे देशों में मौजूद सर्वर के जरिए से भेजता है. इससे यूजर की ऑनलाइन पहचान पूरी तरह से सुरक्षित रहती है. इसके बाद यूजर ऐसे कंटेंट या वेबसाइट पर आसानी से पहुंच सकता है जिसे किसी देश या क्षेत्र में बैन किया गया है.

नए नियम क्या कहते हैं

रिपोर्ट के अनुसार, नए नियम लागू होने पर VPN कंपनियों को भारत में अपना कार्यालय स्थापित करना पड़ सकता है. इसके अलावा कंपनियों को देश में अपना स्थानीय अधिकारी भी नियुक्त करना पड़ेगा जो सरकार की ओर से भेजे गए निर्देशों, शिकायतों और कानूनी अनुरोधों का समय पर जवाब दे सके. इस नियम को कंपनियों और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए लाया जा रहा है.

नियम तोड़ने पर क्या होगा

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार केवल नए नियम ही नहीं बना रही है बल्कि नियमों को तोड़ने के लिए भी नियम तैयार किए जा रहे हैं. नियम ना मानने वालों पर सरकार सख्त एक्शन भी ले सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, अगर कोई VPN कंपनी सरकारी निर्देशों का पालन नहीं करती है तो उसके भारत में नियुक्त अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. इसमें जुर्माने के साथ जेल की सजा जैसे प्रावधान भी शामिल हो सकते हैं.

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