Tech Worker Layoffs: आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच गैलप की एक स्टडी ने सबको हैरान कर दिया है. इस स्टडी के मुताबिक जो तकनीकी कर्मचारी एआई का इस्तेमाल बहुत कम करते हैं या बिल्कुल नहीं करते, उनकी नौकरी जाने का खतरा उन कर्मचारियों से तीन गुना ज्यादा होता है जो नियमित रूप से एआई का उपयोग करते हैं. यह सर्वे फरवरी में अमेरिका के 23,000 से भी ज्यादा कर्मचारियों पर किया गया था, जिनमें सामने आया कि 620 लोगों ने अपनी नौकरी से हाथ धो बैठे थे.

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गैलप ने पाया कि जो टेक कर्मचारी महीने में एक बार से भी कम एआई का इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए नौकरी जाने की संभावना 18 प्रतिशत तक पहुंच जाती है. वहीं दूसरी तरफ, जो कर्मचारी महीने में कम से कम एक बार एआई इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए यह खतरा सिर्फ 6 प्रतिशत रहता है. यानी सीधा-सीधा फर्क तीन गुने का है. 

टेक सेक्टर में पहले से ज्यादा छंटनी

इस रिसर्च में एक और दिलचस्प बात सामने आई है. आंकड़ों के अनुसार, कुल नौकरी करने वाले लोगों में टेक कर्मचारियों की हिस्सेदारी सिर्फ 6% है, लेकिन नौकरी गंवाने वालों में उनका हिस्सा 13% तक है.  यानी टेक इंडस्ट्री में नौकरी जाने का खतरा वैसे भी ज्यादा है, और जो लोग एआई से दूरी बनाए रखते हैं, उनके लिए यह खतरा और भी बढ़ जाता है. गैलप की रिपोर्ट के अनुसार, टेक सेक्टर में काम करने वाले करीब 31% कर्मचारियों को डर है कि भविष्य में नई टेक्नोलॉजी और AI के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से उनकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है. 

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क्या कंपनियां छंटनी में AI स्किल्स को भी दे रही हैं महत्व?

यहां एक दिलचस्प बात यह भी है कि सीधे तौर पर बहुत कम लोग अपनी नौकरी जाने का कारण एआई को मानते हैं.  गैलप की रिपोर्ट कहती है कि छंटनी का सामना करने वाले कर्मचारियों में से सिर्फ 1% ने सीधे एआई को अपनी नौकरी जाने की वजह बताया.  ज्यादातर लोगों ने कंपनी में बदलाव, खर्च घटाने और आर्थिक हालात जैसी सामान्य वजहें बताईं. लेकिन रिसर्चर्स का मानना है कि यह आंकड़ा एआई के असली असर को पूरी तरह नहीं दिखा पाता. हो सकता है कि कंपनियां छंटनी का फैसला लेते समय यह भी देख रही हों कि कौन कर्मचारी एआई के साथ सहज है और कौन नहीं, भले ही इसे खुलकर कारण के तौर पर न बताया जाए. 

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