eSIM Use: पिछले कुछ समय से eSIM का क्रेज कम होता नजर आ रहा है. दुनिया के कई हिस्सों में लोग फिजिकल सिम को बदलने के लिए तैयार नहीं है. eSIM के कई फायदे होने के बावजूद इसके लिए लोगों को मनाना काफी मुश्किल होता जा रहा है. साउथ कोरिया से सामने आए ताजा डेटा ने इस सच्चाई की तरह सबका ध्यान खींचा है. यहां पर eSIM लेने वाले लोग बहुत कम हैं, अमेरिका में जहां स्थिति थोड़ी बेहतर है, वहां भी डिवाइस की मजबूरी के चलते लोग इस सिम को खरीद रहे हैं. आइए जानते हैं कि eSIM को लेकर ताजा डेटा क्या कहानी बता रहे हैं.

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साउथ कोरिया के डेटा ने सबको चौंकाया

एक रिपोर्ट के मुताबिक, साउथ कोरिया में केवल 5 प्रतिशत मोबाइल यूजर्स ही eSIMs यूज कर रहे हैं. यहां लगभग 5.7 करोड़ फोन यूजर्स हैं, जिनमें से लगभग 30 लाख ही ऐसे हैं, जो eSIM यूज कर रहे हैं. यह संख्या भी तब बढ़ी है, जब एक नेटवर्क स्कैंडल के कारण कई यूजर्स ने फिजिकल सिम कार्ड को छोड़कर eSIM यूज करना शुरू किया है. पिछले साल यह संख्या केवल 3 प्रतिशत थी. रिपोर्ट में बताया गया है कि पब्लिक अवेयरनेस की कमी के कारण यह स्थिति बनी हुई है. सरकार भी इसे लेकर चिंतित है और अब कुछ कदम उठाने की तैयारी चल रही है.

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अमेरिका में कहानी अलग, लेकिन वजह भी दूसरी

eSIM के यूज को लेकर अमेरिका में कहानी अलग है और यहां करीब 38 प्रतिशत मोबाइल यूजर इस सिम को यूज कर रहे हैं. हालांकि, इसकी वजह भी दूसरी है. दरअसल, अमेरिका में बिकने वाले कई स्मार्टफोन मॉडल्स केवल eSIM सपोर्ट के साथ आते हैं, जिस कारण ग्राहकों के पास फिजिकल सिम कार्ड खरीदने का ऑप्शन नहीं बचता और उन्हें eSIM ही यूज करनी पड़ती है. अगर यूके की बात की जाए तो यहां करीब 40 प्रतिशत लोगों का कहना है कि उन्होंने कभी eSIM के बारे में नहीं सुना, वहीं 41 प्रतिशत लोगों का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि उनका फोन eSIM को सपोर्ट करता है या नहीं.

eSIM से थीं बड़ी उम्मीदें

2024 में GSMA की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि 2028 तक नए कनेक्शन में से लगभग 50 प्रतिशत eSIM के जरिए दिए जाएंगे और 2030 तक यह संख्या 88 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी. लेकिन ताजा आंकड़ों को देखकर लग रहा है कि 2028 तक ये अनुमान सच्चाई में बदलने काफी मुश्किल हैं.

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