Solar Panel: पिछले कुछ सालों से हमारे देश में सोलर एनर्जी पर फोकस बढ़ा है. अब हाईवे के किनारों से लेकर गांवों के अंदर तक हर जगह आपको सोलर पैनल दिख जाएंगे. यही वजह है कि भारत सोलर एनर्जी का तीसरा सबसे बड़ा प्रोड्यूसर बन गया है. भारत के कई हिस्सों में मार्च से लेकर सितंबर-अक्टूबर तक खूब गर्मी पड़ती है और कई जगहों पर तापमान 50 डिग्री तक पहुंच जाता है. ऐसे में कई लोगों को लग सकता है कि ज्यादा तापमान से ज्यादा बिजली पैदा होती होगी. असल में ऐसा नहीं है. आइए जानते हैं कि सोलर एनर्जी पर ज्यादा टेंपरेचर का क्या असर होता है.

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ज्यादा टेंपरेचर से कम होती है सोलर पैनल की परफॉर्मेंस

कम ही लोग इस बात को जानते हैं कि ज्यादा टेंपरेचर से सोलर पैनल की परफॉर्मेंस कम होती है. रिपोर्ट्स के अनुसार, 25 डिग्री सेल्सियस से ऊपर टेंपरेचर जाने पर सोलर पैनल की एफिशिएंसी थोड़ी कम होती जाती है. 25 डिग्री सेल्सियस के बाद हर डिग्री के हिसाब से सोलर पैनल की एफिशिएंसी 0.34 प्रतिशत कम हो जाती है. यानी टेंपरेचर 35 डिग्री सेल्सियस है तो सोलर पैनल 25 डिग्री टेंपरेचर की तुलना में लगभग 3.4 प्रतिशत कम बिजली पैदा करेंगे. हालांकि, साफ मौसम और लंबे दिनों में एफिशिएंसी कम होने के बावजूद ये पैनल ज्यादा पावर जनरेट करते हैं.

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क्या सोलर पैनल को बिजली पैदा करने के लिए तेज धूप की जरूरत होती है?

कई लोगों के मन में यह सवाल भी उठता है कि क्या सोलर पैनल केवल तेज धूप होने पर ही काम करते हैं? इसका जवाब नहीं है. इन पैनल को काम करने के लिए डायरेक्ट सनलाइट की भी जरूरत नहीं होती. थोड़ी-सी धूप होने पर ही ये बिजली जनरेट करना शुरू कर देते हैं. यही वजह है कि सर्दियों के मौसम में तेज धूप न होने के बाद भी ये पैनल काम करते हैं. हालांकि, धूप तेज होगी तो ये पैनल ज्यादा बिजली पैदा कर पाएंगे. 

रात के समय सोलर पैनल से बिजली कैसे मिल सकती है?

रात के समय धूप न होने के कारण सोलर पैनल बिजली जनरेट नहीं कर सकते. इस स्थिति में बैटरी स्टोरेज सिस्टम को यूज किया जा सकता है, जो दिन में जनरेट हुई बिजली को स्टोर कर रात में रिलीज कर सकता है. इस सिस्टम में आमतौर पर लिथियम-आयन बैटरी का यूज जाता है. ये बैटरियां आराम से इतनी बिजली स्टोर कर सकती है कि पूरी रात घर की एनर्जी जरूरतें पूरा हो जाए.

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