Solar Panel Energy Generation: सोलर पैनल पूरी तरह सनलाइट पर डिपेंड होते हैं. ये सनलाइट को ही कैप्चर कर उसे बिजली में बदलते हैं. अगर सनलाइट नहीं होती है तो सोलर पैनल भी काम नहीं करते हैं. इस कारण कई लोगों को लगता है कि गर्मी के मौसम में जब तेज धूप होती है तो सोलर पैनल भी ज्यादा बिजली पैदा करते होंगे. असल में ऐसा नहीं है. सोलर पैनल पर टेंपरेचर का भी असर पड़ता है. अगर टेंपरेचर ज्यादा हो जाता है तो सोलर पैनल की एफिशिएंसी थोड़ी कम हो जाती है. इसलिए भीषण गर्मी में सोलर पैनल का एनर्जी प्रोडक्शन ज्यादा होने की जगह कम हो जाता है.
ज्यादा गर्मी में कम बिजली क्यों बनाते हैं पैनल?
इसका जवाब साइंस में छिपा हुआ है. दरअसल, धूप में सूरज से निकले फोटोन सोलर पैनल तक पहुंचते हैं. सोलर पैनल के पास पहुंचकर ये इलेक्ट्रिक फील्ड क्रिएट कर लेते हैं, जिससे इलेक्ट्रॉन्स मूव होना शुरू हो जाते हैं और करंट पैदा होता है, जिससे बिजली बनती है. लेकिन जब टेंपरेचर ज्यादा होता है तो सोलर पैनल ज्यादा गर्म हो जाते हैं. इससे इलेक्ट्रॉन्स समेत सारे मॉलिक्यूल की हलचल बढ़ जाती है. यानी इलेक्ट्रॉन जरूरत से ज्यादा हिलने लगते हैं और ये उस जगह पर मूव नहीं हो पाते, जहां इन्हें होना चाहिए. इससे वॉल्टेज कम हो जाती है और एनर्जी प्रोडक्शन कम हो जाता है.
कितने टेंपरेचर तक फुल एफिशिएंसी के साथ काम करते हैं सोलर पैनल?
25 डिग्री सेल्सियस तक सोलर पैनल अपनी पूरी एफिशिएंसी के साथ काम करते हैं. इसके बाद जैसे-जैसे टेंपरेचर बढ़ता जाएगा, हर डिग्री के साथ-साथ एफिशिएंसी में 0.5 प्रतिशत की कमी आती जाती है. यानी अगर टेंपरेचर 45 डिग्री तक पहुंच जाए तो सोलर पैनल की एफिशिएंसी 10 प्रतिशत तक कम हो सकती है.
कैसे बढ़ाएं एफिशिएंसी?
सोलर पैनल की मैक्सिमम एफिशिएंसी के लिए पैनल की पॉजीशन सही होना जरूरी है. सोलर पैनल हमेशा साउथ फेसिंग होने चाहिए, जिससे ज्यादा से ज्यादा सनलाइट को कैप्चर किया जा सके. इसी तरह पैनल का साफ होना भी आवश्यक है. पैनल गंदे होने पर एनर्जी प्रोडक्शन में 15 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है. मैक्सिमम एफिशिएंसी के लिए हाई क्वालिटी वाले पैनल चुनें. इनकी लागत भले ही ज्यादा हो, लेकिन इनका लाइफ स्पैन ज्यादा होता है और ये ज्यादा बिजली जनरेट कर पाएंगे.
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