AI Use:एआई का यूज लगातार बढ़ता जा रहा है और अब यह हमारे जीवन का हिस्सा बनती जा रही है. बॉस को मेल लिखना हो या किसी टॉपिक पर जानकारी लेनी हो, हर काम आजकल एआई से हो रहा है. इसके कई फायदे हैं, लेकिन एक नई स्टडी में चिंताजनक जानकारी सामने आई है. स्टडी में बताया गया है कि एआई का यूज करने वाले लोगों के लिए जब कोई एआई टूल अवेलेबल नहीं होता तो उनकी परफॉर्मेंस पर असर पड़ता है. यानी एआई से लोगों की सोचने की क्षमता पर असर पड़ रहा है. लंबे समय तक एआई यूज करने के बाद लोग स्वतंत्र तरीके से सोच नहीं पाते हैं.
एआई ने कैसे बदल दिया काम करने का तरीका?
एआई टूल्स आने से पहले लोग किसी टॉपिक के बारे में जानने के लिए इंटरनेट पर सर्च करते थे. कुछ लोग यूट्यूब वीडियोज देखकर भी यह जानकारी लेते थे, लेकिन अब हर सवाल का जवाब एआई चैटबॉट्स पर ढूंढा जा रहा है. जरूरत के समय एआई पलक झपकते ही जवाब दे देती है. यह भले ही टाइम बचाने वाला लगता है, लेकिन धीरे-धीरे इसके कारण लोगों का संयम भी जवाब दे रहा है. यह तब और स्पष्टता से नजर आता है, जब लोगों को बिना एआई की मदद लिए कोई काम करना होता है. स्टडी में सामने आया कि एआई की मदद के बिना लोग अब जल्दी हाथ खड़े कर रहे हैं.
रिसर्चर ने बताया 'कॉग्नेटिव ऑफलोडिंग' का मामला
रिसर्चर इस स्थिति को 'कॉग्नेटिव ऑफलोडिंग' करार देते हैं. यह ऐसी सिचुएशन होती है, जिसमें लोग अपनी सोच के लिए मशीनों पर निर्भर हो जाते हैं. स्टडी के दौरान एआई के साथ और एआई के बिना लोगों की परफॉर्मेंस देखी गई थी. एआई के साथ लोगों ने अच्छा परफॉर्म किया. वहीं जब उनसे बिना एआई काम करने को कहा गया तो उनकी परफॉर्मेंस में कमी देखी गई. बिना एआई की मदद लिए लोगों ने कई गलतियां की और सवालों को जल्दी स्किप कर दिया. इससे यह भी पता चला कि एआई के बिना लोग ज्यादा कोशिश करने को भी तैयार नहीं हैं.
एक्सपर्ट्स ने दी यह चेतावनी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि एआई के कारण काम पहले से तेज और एफिशिएंसी के साथ हो जाता है, लेकिन इसका ज्यादा इस्तेमाल हमारे फोकस और कॉन्फिडेंस के लिए खतरनाक है. इन टेक्नोलॉजी पर निर्भरता से लोगों की प्रॉब्लम सॉल्व करने की क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है.
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