ChatGPT जैसे चैटबॉट आने से काम भले ही आसान हो गए हैं, लेकिन ये आपके दिमाग के लिए अच्छे नहीं हैं. पेंसिलवेनिया यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में पता चला है कि चैटजीपीटी जैसे चैटबॉट से कम समय में सही जवाब मिल जाता है, लेकिन इसके लिए दिमाग को कीमत चुकानी पड़ती है. रिसर्च में सामने आया कि जिन यूजर्स ने जानकारी के लिए गूगल सर्च का यूज किया, उन्हें चैटबॉट यूज करने वाले यूजर्स के मुकाबले ज्यादा डीप जानकारी थी और वो किसी टॉपिक पर लंबी सलाह दे सकते थे, जबकि चैटबॉट यूज करने वाले लोगों के पास ऑरिजनल आइडियाज नहीं थे. 

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चैटबॉट से नहीं सीख रहे नई चीजें

10,000 से ज्यादा लोगों पर की गई रिसर्च में सामने आया कि एआई चैटबॉट पर निर्भर लोग नई चीजें नहीं सीख पा रहे हैं. साथ ही उन्हें अपनी जानकारी पर पूरा भरोसा भी नहीं है. इसकी तुलना में गूगल सर्च से जानकारी लेने वाले लोगों के पास गहरी जानकारी होती है और वो लंबी सलाह दे सकते हैं. दरअसल, ट्रेडिशनल वेब सर्च में यूजर को ज्यादा कोशिश करनी पड़ती है. वह जानकारी लेने के लिए अलग-अलग लिंक्स पर जाता है और कई लिंक्स से जानकारी निकालकर अपनी राय बनाता है. इससे वह किसी चीज को बेहतर तरीके से समझ पाता है. दूसरी तरफ चैटबॉट पूछी गई जानकारी को एक साथ दिखा देते हैं, जिससे यूजर को उसके दूसरे पहलुओं के बारे में पता नहीं चल पाता.

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एआई के यूज का असर

रिसर्च से पता चला कि एआई टूल्स कोडिंग, राइटिंग और एग्जाम की तैयारी जैसे कामों में यूज हो सकते हैं, लेकिन पूरी तरह इन पर निर्भर होने से आप नॉलेज डेवलप नहीं कर पाएंगे. साथ ही एआई से क्रिएटेड कंटेट में भी ऑरिजिनलिटी नहीं होती. एआई टूल्स भले ही आपका समय बचा सकते हैं, लेकिन ये आपको एक्टिव लर्नर नहीं बना पाते. 

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