Solar Power: सोलर पावर आज के समय में काफी तेजी से लोगों के बीच फेमश हो रहा है. बढ़ती बिजली की कीमतों और पर्यावरण को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अब सोलर एनर्जी का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ने लगा है. यहां तक की अब सरकार भी लोगों से सोलर एनर्जी का इस्तेमाल करने की सलाह दे रही है.

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लेकिन अक्सर लोगों के मन में एक सवाल आता है कि क्या कोई घर पूरी तरह सोलर एनर्जी पर चल सकता है? यानी क्या बिजली का सरकारी कनेक्शन हटाकर सिर्फ सोलर पैनल और बैटरी की मदद से पंखा, टीवी, फ्रिज, कूलर, लाइट और दूसरे डिवाइस चलाए जा सकते हैं? आइए जानते हैं क्या है इसकी सच्चाई.

क्या होता है सोलर घर

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी तरह सोलर घर का मतलब होता है ऐसा सिस्टम जिसमें घर की बिजली की जरूरत पूरी तरह से सोलर पैनल से पूरी होती है और रात या बादल वाले मौसम में बैटरी की मदद से बिजली की पूर्ती होती है. ऐसे सिस्टम को आमतौर पर ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम कहा जाता है.

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ऑन-ग्रिड सिस्टम में सोलर पैनल के साथ बिजली का सरकारी कनेक्शन भी रहता है. वहीं ऑफ-ग्रिड सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि घर जरूरत पड़ने पर ग्रिड के बिना भी चलता रहे.

दिन में सोलर पैनल कैसे देते हैं बिजली

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सोलर पैनल सूरज की रोशनी को बिजली में कनवर्ट करते हैं. दिन में बनने वाली बिजली से घर के डिवाइस चलाए जा सकते हैं. अगर उस समय बिजली की जरूरत कम है तो एक्सट्रा बिजली बैटरी में स्टोर की जा सकती है.

रात में कैसे चलेगा घर

आपको बता दें कि 100% सोलर सिस्टम का सबसे जरूरी हिस्सा यही होता है. रात में सोलर पैनल बिजली नहीं बनाते हैं इसलिए बैटरी की जरूरत पड़ती है. बैटरी की ताकत इस बात पर निर्भर करती है कि घर में कितनी बिजली इस्तेमाल होती है और कितने घंटे तक बैकअप चाहिए. अगर कोई परिवार रात में पंखे, लाइट, टीवी, फ्रिज और दूसरे डिवाइस चलाता है तो छोटी बैटरी काफी नहीं होगी.

आज के समय में लिथियम-आयन बैटरियां घरेलू सोलर सिस्टम में फेमश हो रही हैं क्योंकि इनकी बिजली ताकत अच्छी होती है और इन्हें बार-बार चार्ज किया जा सकता है.

कितने सोलर पैनल की जरूरत होगी

दरअसल, इसका कोई एक तय जवाब नहीं है. सिस्टम का साइज घर की टोटल बिजली खपत पर निर्भर करता है. अगर किसी घर में महीने भर में बिजली की खपत ज्यादा है तो ज्यादा ताकत वाले सोलर पैनल लगाने पड़ेंगे. आपको बता दें कि सिर्फ पैनल की ताकत देखना काफी नहीं होता है. इन बातों का भी ध्यान रखना पड़ता है.

  • रोजाना कितनी यूनिट बिजली चाहिए
  • दिन में कितनी बिजली खर्च होती है
  • रात में कितनी बिजली चाहिए
  • कितने घंटे का बैकअप चाहिए
  • आपके इलाके में धूप कितनी मिलती है
  • गर्मियों और सर्दियों में खपत कितनी बदलती है

इसलिए सोलर सिस्टम लगाने से पहले घर की असली बिजली खपत का आकलन करना जरूरी है.

बादल और बारिश में क्या होगा

अगर आपका घर पूरी तरह से सोलर पर निर्भर करता है तो बादल या बारिश का मौसम आपके लिए चुनौती बन सकता है. तेज धूप वाले दिन में पैनल अच्छे से बिजली बनाते हैं लेकिन बादल या बारिश के दौरान कम बिजली बनती है.

अगर बैटरी पहले से अच्छी तरह से चार्ज है तो घर में बिजली की सप्लाई चालू रहेगी लेकिन अगर लगातार कई दिनों तक धूप कम रहने पर बैटरी भी खाली हो सकती है. इसलिए ऐसे सिस्टम में बैकअप के लिए एक्सट्रा बैटरी रखना जरूरी हो जाता है.

क्या भारी डिवाइस भी चल सकते हैं

जी हां, लेकिन इसके लिए सिस्टम को उसी हिसाब से डिजाइन करना होगा. फ्रिज, पानी की मोटर, कूलर, माइक्रोवेव, वॉशिंग मशीन और एयर कंडीशनर जैसे डिवाइस ज्यादा बिजली खींच सकते हैं.

खासकर AC को लंबे समय तक सोलर से चलाने के लिए काफी बड़ी सोलर ताकत और बैटरी स्टोरेज की जरूरत पड़ती है. इसलिए सिर्फ ये देखना काफी नहीं है कि घर में कितने डिवाइस हैं बल्कि ये भी देखना जरूरी है कि वे कितनी देर चलते हैं.

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