सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करते समय अचानक कोई आकर्षक विज्ञापन सामने आना आम बात है. कभी सस्ते सामान का ऑफर, कभी फ्री गिफ्ट तो कभी किसी ऐप या इनवेस्टमेंट से जुड़ा दावा. ऐसे Ads देखने में बिल्कुल नॉर्मल लग सकते हैं लेकिन साइबर अपराधी इन्हीं का इस्तेमाल यूजर्स को Malware और फर्जी वेबसाइट तक पहुंचाने के लिए कर रहे हैं. एक गलत क्लिक आपकी पर्सनल जानकारी और बैंकिंग डिटेल्स को खतरे में डाल सकता है.
सोशल मीडिया Ads क्यों बन रहे हैं खतरा?
Facebook, Instagram और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐड बड़ी संख्या में यूजर्स तक पहुंचते हैं. साइबर अपराधी इसी पहुंच का फायदा उठाकर ऐसे Ads तैयार करते हैं जो असली कंपनियों या ऑफर्स जैसे दिखाई देते हैं.
कई बार ऐड पर क्लिक करने के बाद यूजर को किसी दूसरी वेबसाइट पर भेज दिया जाता है. वहां डिस्काउंट, कूपन, फ्री रिवॉर्ड या किसी जरूरी अपडेट के नाम पर मोबाइल ऐप डाउनलोड करने या पर्सनल जानकारी दर्ज करने के लिए कहा जा सकता है.
एक क्लिक के बाद कैसे शुरू होता है खेल?
फर्जी विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद यूजर को ऐसी वेबसाइट दिखाई जा सकती है जो देखने में किसी जानी-मानी कंपनी की वेबसाइट जैसी लगे. इसके बाद वहां APK या कोई दूसरा सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है.
अगर यूजर अनजान सोर्स से ऐप इंस्टॉल कर देता है तो उसमें मौजूद Malware डिवाइस में घुस सकता है. ये खतरनाक सॉफ्टवेयर SMS, नोटिफिकेशन या दूसरी जरूरी जानकारी तक पहुंच हासिल करने की कोशिश करता है. बैंकिंग से जुड़े OTP या दूसरे अलर्ट भी इसकी नजर में आ सकते हैं.
फर्जी Ads से बैंक अकाउंट कैसे खतरे में पड़ सकता है?
हर Malware सीधे बैंक अकाउंट खाली नहीं करता है लेकिन उसका मकसद यूजर की संवेदनशील जानकारी हासिल करना होता है. जैसे कोई फर्जी ऐप बैंकिंग क्रेडेंशियल्स चुराने या स्क्रीन पर दिखाई देने वाली जानकारी को हासिल करने की कोशिश करता है.
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दूसरी तरफ कुछ विज्ञापन सीधे Phishing वेबसाइट पर ले जाते हैं. वहां यूजर से बैंक डिटेल, कार्ड की जानकारी, UPI से जुड़ी जानकारी या लॉगिन क्रेडेंशियल्स मांगे जा सकते हैं. इन्हें दर्ज करते ही जानकारी साइबर अपराधियों के हाथ लग सकती है.
हर आकर्षक ऑफर पर न करें क्लिक
सोशल मीडिया पर दिखने वाला हर ऐड सुरक्षित हो, ये जरूरी नहीं है. खासतौर पर ऐसे Ads से सावधान रहें जिनमें बेमतलब रूप से भारी डिस्काउंट, फ्री गिफ्ट या तुरंत पैसे कमाने का दावा किया गया हो. किसी भी ऐप को इंस्टॉल करने से पहले उसे ऑफिशियल App Store या Play Store पर खोजें. किसी विज्ञापन से मिली वेबसाइट से APK डाउनलोड करने से बचना बेहतर है. URL में मामूली बदलाव भी फर्जी वेबसाइट का संकेत हो सकता है.
फोन और बैंकिंग को सुरक्षित रखने के आसान तरीके
अपने स्मार्टफोन का ऑपरेटिंग सिस्टम और ऐप्स हमेशा अपडेट रखें. अनजान वेबसाइटों से ऐप डाउनलोड न करें और किसी भी संदिग्ध लिंक पर अपनी पर्सनल या बैंकिंग जानकारी दर्ज न करें. बैंकिंग अलर्ट और लेनदेन की सूचनाओं पर नजर रखें.
अगर किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने या ऐप इंस्टॉल करने के बाद फोन का व्यवहार अचानक बदल जाए तो तुरंत उस ऐप को हटाने, जरूरी अकाउंट्स के पासवर्ड बदलने और बैंक से संपर्क करने जैसे कदम उठाएं. याद रखें, सोशल मीडिया पर दिखने वाला एक छोटा-सा क्लिक भी बड़े वित्तीय नुकसान की वजह बन सकता है.
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