AI Taking Away Jobs: पिछले काफी समय से एआई के कारण लोगों की नौकरियां जा रही हैं. अगर डेटा पर नजर डालें तो इस साल के शुरुआती चार महीनों में एआई के कारण लगभग 92,000 लोग अपनी नौकरी से हाथ धो चुके हैं. मेटा जैसी बड़ी कंपनियां लगातार छंटनी कर रही हैं, जिससे यह संख्या और बढ़ने की संभावना है. हालांकि, चीन में अब इस ट्रेंड पर लगाम लग सकती है. यहां की एक कोर्ट ने कहा है कि एआई के कारण लोगों को नौकरी ने नहीं निकाला जा सकता. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कंपनियां केवल इस आधार पर लोगों को नहीं निकाल सकतीं कि उनका काम एआई कर सकती है. आइए इस मामलों के बारे में विस्तार से जानते हैं.
क्या है पूरा मामला?
Zhou सरनेम वाले एक कर्मचारी ने 2022 में बतौर क्वालिटी एश्योरेंस सुपरवाइजर एक एआई कंपनी ज्वॉइन की थी. इस काम के उन्हें हर महीने 25,000 युआन मिल रहे थे. उनका काम लार्ज लैंग्वेज मॉडल की आउटपुट रिव्यू करना, यूजर्स के सवालों को मैच करना और गलत कंटेट फिल्टर करना था. कुछ ही समय बाद उनका पूरा काम एआई ने संभाल लिया, जिसके बाद कंपनी ने उन्हें कम पैसे पर काम करने का ऑफर दिया था. इस ऑफर को रिजेक्ट करने पर Zhou को नौकरी से निकाल दिया गया.
कोर्ट पहुंचा मामला
Zhou अपने टर्मिनेशन को लेकर कोर्ट चले गए. उन्होंने दलील दी कि कंपनी ने उन्हें गलत तरीके से नौकरी से निकाला है. दलीलें सुनने के बाद Hangzhou Intermediate People’s Court ने फैसला दिया कि Zhou को गलत तरीके से नौकरी से निकाला गया है. कोर्ट ने कहा कि एआई के कारण किसी कर्मचारी को नौकरी से निकालने का कोई कानूनी आधार नहीं है. कंपनी यह साबित नहीं कर पाई कि Zhou का काम असंभव हो गया था. साथ ही उसे कम पैसे पर नौकरी ऑफर करना तर्कसंगत नहीं है. उसे नौकरी से निकालना गलत है.
लीगल एक्सपर्ट्स ने कही यह बात
इस मामले से जुड़े लीगल एक्सपर्ट्स का कहना है कि फैसले ने एक बड़ी लकीर खींच दी है. कंपनियां एआई का फायदा उठा सकती हैं, लेकिन उन्हें इसके कारण कर्मचारियों पर पड़ने वाले असर की जिम्मेदारी भी लेनी होगी.
एआई के कारण नौकरियों पर आया संकट
एआई के आने के बाद से ही नौकरियों पर संकट आया हुआ है. मेटा, अमेजन, गूगल, स्नैप और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियां अपने हजारों कर्मचारियों को पिंक स्लिप थमा चुकी हैं और नौकरियों जाने का संकट अभी टला नहीं है. अब एआई कोडिंग जैसे कई काम आसानी से कर सकती है, जिससे सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की जरूरत पर सवाल खड़ा हो गया है.
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