आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने सॉफ्टवेयर बनाने का तरीका काफी तेजी से बदल दिया है. AI कोडिंग टूल्स की मदद से डेवलपर्स पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी से कोड लिख पा रहे हैं. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि AI से सॉफ्टवेयर बनाने की रफ्तार बढ़ने के बावजूद उसके इस्तेमाल में वैसी तेजी नहीं आई है. यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया और MIT के शोधकर्ताओं की एक स्टडी में इसकी वजह सामने आई है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शोधकर्ताओं ने 2022 से 2026 के बीच 1 लाख से ज्यादा डेवलपर्स की एक्टिविटी का अध्ययन किया. इसमें AI कोडिंग टूल्स की अलग-अलग जनरेशन के आने के बाद डेवलपर्स की प्रोडक्टिविटी में हुए बदलाव को देखा गया. स्टडी के मुताबिक, शुरुआती ऑटोकम्प्लीट सिस्टम ने कोडिंग एक्टिविटी में करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी की. इसके बाद रियल टाइम में कोड बदलने वाले सिंक एजेंट्स के साथ यह बढ़ोतरी करीब 140 प्रतिशत और खुद काम करने वाले असिंक्रोनस AI एजेंट्स के साथ करीब 180 प्रतिशत तक पहुंच गई.
लेकिन ज्यादा कोड का मतलब ज्यादा सॉफ्टवेयर नहीं
आपको बता दें कि यहां असली समस्या सामने आती है. AI ने डेवलपर्स को ज्यादा कोड लिखने में मदद की लेकिन इस एक्सट्रा कोड का पूरा फायदा तैयार सॉफ्टवेयर के रूप में नहीं दिखा.
शोध के अनुसार, AI की मदद से सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट्स की संख्या में करीब 50 प्रतिशत और सॉफ्टवेयर रिलीज में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई. यानी कोडिंग की प्रोडक्टिविटी में 180 प्रतिशत तक की छलांग के मुकाबले फाइनल आउटपुट की बढ़ोतरी काफी कम रही है.
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असली अड़चन अब कोडिंग नहीं
शोधकर्ताओं के मुताबिक, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में समस्या अब केवल कोड लिखने की नहीं रह गई है. कोड तैयार होने के बाद उसे रिव्यू करना, अलग-अलग सिस्टम के साथ इंटीग्रेट करना, टेस्ट करना और रिलीज करना अभी भी काफी हद तक इंसानों पर निर्भर है. यही वजह है कि AI जितना तेजी से नया कोड तैयार कर रहा है, उतनी तेजी से इंसानी टीमें उस कोड को प्रोडक्शन में नहीं पहुंचा पा रही हैं.
ऐप्स बढ़े, लेकिन यूजर्स नहीं
स्टडी ने Apple App Store, Google Play Store, Chrome Web Store और SourceForge जैसे बड़े सॉफ्टवेयर मार्केटप्लेस का भी एनलाइसिस किया. यहां 2025 के मध्य से नए सॉफ्टवेयर और ऐप्स की संख्या में तेज वृद्धि देखने को मिली है.
मसलन, Apple App Store पर AI कोडिंग एजेंट्स के आने से पहले हर महीने करीब 30 हजार नए ऐप रिलीज होते थे. अप्रैल 2026 तक यह आंकड़ा करीब 1 लाख ऐप प्रति माह पहुंच गया. इसके बावजूद कुल ऐप इस्तेमाल में इसी रेशियो में बढ़ोतरी नहीं हुई है.
AI का अगला पड़ाव क्या होगा?
शोध के मुताबिक AI की अगली चुनौती केवल बेहतर कोड लिखना नहीं बल्कि सॉफ्टवेयर के पूरे डेवलपमेंट सर्किल को तेज करना है. अगर AI कोड की समीक्षा, टेस्टिंग, इंटीग्रेशन और रिलीज जैसे स्टेज में भी भरोसेमंद तरीके से मदद कर पाता है तो कोडिंग प्रोडक्टिविटी और असली सॉफ्टवेयर आउटपुट के बीच का अंतर कम हो सकता है.
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