AI Impact On World: बीते 3-4 वर्षों में एआई टूल्स ने हमारे काम करने का तरीका बदल दिया है. अब ईमेल लिखने से लेकर डॉक्यूमेंट एनलाइज करने तक सारे काम एआई टूल्स से हो रहे हैं और ये टूल्स हर दिन के साथ एडवांस होते जा रहे हैं. अब एआई को लेकर एक डराने वाला अनुमान सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि इंसानों के पास सिर्फ तीन साल का समय बचा है. तीन साल में एआई सिस्टम दुनिया को पूरी तरह बदलकर रख देंगे.

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"एआई बन जाएगी बहुत पावरफुल"

Google X के बिजनेस चीफ Mo Gawdat ने वॉर्निंग दी है कि एआई टूल्स तो सिर्फ झलक है और असल एआई बहुत पावरफुल है. उन्होंने कहा कि इंसानों के पास सिर्फ तीन साल का समय बचा है. तीन सालों में एआई इतनी पावरफुल हो जाएगी कि यह इंडस्ट्री को बदल कर रख देगी, इसके कारण लाखों नौकरियां खत्म हो जाएंगी और समाज का भी पूरा स्वरूप बदल जाएगा. एक पॉडकास्ट में बोलते हुए उन्होंने कहा कि 2027 तक आर्टिफिशियल जनरल इंटेलीजेंस (AGI) का दौर आ जाएगा. AI से AGI के ट्रांजिशन में नौकरियां भी जाएंगी, अर्थव्यवस्था और समाज में भी बदलाव देखने को मिलेगा. उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध में भी एआई का इस्तेमाल बढ़ेगा.

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AI से ज्यादा इसके इस्तेमाल के तरीके से खतरे- Gawdat 

Gawdat का कहना है कि एआई अपने आप में खतरा नहीं है, लेकिन बड़ी कंपनियां और सरकारें इसे कैसे यूज करती हैं, वह ज्यादा बड़ा खतरा है. लोग सिर्फ वायरल वीडियोज और चैटबॉट्स के जरिए एआई को एक्सपीरियंस कर रहे हैं, लेकिन रिसर्च लैब्स में जो हो रहा है वह बहुत महत्वपूर्ण है. अब ऐसे सिस्टम आ रहे हैं, जो अपने कोड इंप्रूव करने के साथ-साथ चेंज भी टेस्ट कर सकते हैं और खुद के बेहतर वर्जन को डिप्लॉय करने की काबिलियत रखते हैं. उन्होंने कहा कि AI पर काम करने वाले लोग इसकी जो कैपेबिलिटीज देख रहे हैं, वो आम पब्लिक की सोच से कहीं आगे हैं. एआई की कैपेबिलिटीज और लोगों की समझ के बीच बहुत बड़ा अंतर है और इसी कारण लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं कि एआई दुनिया में कितना बड़ा बदलाव ला सकती है.

नौकरियों पर खतरा

एआई के कारण नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है. Gawdat का भी मानना है कि नई टेक्नोलॉजी का ज्यादा असर एंट्री-लेवल की नौकरियों पर होगा. कॉल एजेंट्स, एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट, ट्रैवल अजेंट और कंप्यूटर पर काम करने वाले लोगों की नौकरियां पहले जा सकती हैं, वहीं कारपेंटरी जैसे काम अभी भी इंसान करते रहेंगे. इन मुश्किल फिजिकल कामों को रोबोट समझ नहीं पाते हैं.

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