AC vs Cooler vs Fan:सीलिंग फैन, कूलर और एसी के बिना गर्मी का मौसम निकालना काफी मुश्किल हो जाता है. पारा चढ़ने के साथ ही पंखा ठंडी हवा देना बंद कर देता है और कूलर की जरूरत पड़ने लगती है. मानसून के दौरान जब उमस बढ़ जाती है तो कूलर भी हाथ खड़े कर देता है तो एसी की याद आती है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि ये तीनों कैसे काम करते हैं, इन्हें किस मौसम में और कैसे यूज करना चाहिए ताकि मैक्सिमम कंफर्ट मिल सके. 

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पंखे को कैसे करें यूज?

पंखा कमरे का टेंपरेचर कम नहीं करता, लेकिन यह एयर सर्कुलेशन बढ़ा देता है, जिससे गर्मी से कुछ राहत मिलती है. इसे एसी के साथ भी यूज किया जा सकता है, जिससे यह पूरे कमरे में हवा को फैला देता है. पंखे को एफिशिएंटली काम करने के लिए फर्श से 8-9 फीट ऊंचाई पर लटकाना चाहिए. साथ ही पंखे और छत के बीच कम से कम एक फीट की दूरी रखनी चाहिए ताकि एयरफ्लो बन सके. अगर छत की ऊंचाई ज्यादा है तो डाउनरॉड की मदद ली जा सकती है.

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कूलर कैसे देता है राहत?

कूलर सूखे और गर्म मौसम में सबसे असरदार तरीके से काम करता है. कूलर अपने आसपास से हवा खींचकर उसे कूलिंग पैड की मदद से ठंडा कर कमरे के अंदर फेंकता है. कूलर को एफिशिएंटली काम करने के लिए वेंटिलेशन की जरूरत पड़ती है. पर्याप्त वेंटिलेशन होने पर ये कमरे में उमस नहीं होने देते, जिससे राहत मिलती है. ये एसी की तुलना में कम बिजली की खपत करते हैं और इन्हें बड़े कमरों को भी ठंडा करने के लिए यूज किया जा सकता है. कूलर से ज्यादा ठंडी हवा चाहिए तो वाटर टैंक में बर्फ का इस्तेमाल करें.

एसी कैसे काम करता है?

उत्तर भारत में मानसून के दौरान हवा में नमी बढ़ जाती है और कूलर और पंखे से राहत मिलना मुश्किल हो जाता है. ऐसी कंडीशन में एसी ही काम आता है. एसी रेफ्रिजरेंट की मदद से उमस और गर्मी की खींच लेता है और कमरे को एकदम ठंडा रख सकता है. एसी चलाने का फायदा तभी है, जब कमरे के दरवाजे और खिड़कियां पूरी तरह बंद हो. बिजली बिल की टेंशन खत्म करने और कूलिंग पाने के लिए एसी को 24 डिग्री टेंपरेचर पर चलाएं. एसी से मैक्सिमम कूलिंग के लिए इसकी सर्विस करवाना और रेगुलर फिल्टर साफ करना जरूरी है.

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