New Battery Technology: आज के समय में ज्यादातर डिवाइसेज में बैटरी का इस्तेमाल होता है. स्मार्टफोन से लेकर स्मार्टवॉच या फिर अन्य डिवाइसेज बैटरी की मदद से ही काम करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कोई बैटरी पानी से चलेगी. जी हां, दरअसल, वैज्ञानिकों ने ऐसी बैटरी खोज निकाली है जो पानी से काम करती है. ये बैटरी हवा में मौजूद नमी का इस्तेमाल करते काम करती है. साथ ही इसका डिजाइन भी काफी लचिला है. आइए जानते हैं कि कैसे काम करती है ये नई बैटरी.
नॉर्मल बैटरी से कैसे अलग ये नई बैटरी
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस टेक्नोलॉजी को अमेरिका की नॉर्थ कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी और राइस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मिलकर तैयार किया है. बता दें कि इस रिसर्च के रिजल्ट्स फेमश जर्नल Science Advances में पब्लिश किए गए हैं.
आपको बता दें कि अभी के समय में इस्तेमाल होने वाली ज्यादातर लिथियम-आयन बैटरियां बेहतरीन पावर देती हैं लेकिन इनमें कई समस्या भी होती हैं. इन बैटरी की सबसे बड़ी कमी ये है कि ये मुड़ नहीं सकती हैं और ये वजन में काफी भारी होती हैं. इतना ही नहीं, इनमें आग लगने का भी डर रहता है जो बैटरी को नुकसान पहुंचा सकती है.
वहीं, इस नई बैटरी में ऐसा कुछ भी नहीं है. इसमें किसी तरह का लिक्विड इलेक्ट्रोलाइट पहले से मौजूद नहीं होता है. जब ये बैटरी हवा के संपर्क में आती है तो आस-पास की नमी को सोख लेती है. इसके बाद अंदर मौजूद लिथियम क्लोराइड नमक पानी में घुलकर खारे पानी जैसा इलेक्ट्रोलाइट तैयार करता है जिससे बिजली का फ्लो शुरू हो जाता है.
पर्यावरण के लिए भी है सुरक्षित
वैज्ञानिकों के अनुसार इस बैटरी से पर्यावरण में कोई नुकसान नहीं पहुंचता है. इतना ही नहीं ये बैटरी पर्यावरण के साथ-साथ इंसानों के लिए भी अनुकूल है. बता दें कि इसमें मैग्नीशियम एनोड, सिल्वर बेस्ड कैथोड और पौधों से तैयार सेलूलोज मेम्ब्रेन का इस्तेमाल किया गया है. इसके अलावा ये नमक वाले पानी के जरिए काम करता है इसीलिए इसमें आग लगने का खतरा भी काफी कम रहता है.
लंबे समय तक भी रहती है सेफ
जानकारी के मुताबिक, इस बैटरी की एक खासियत ये है कि जब तक इसे हवा नहीं मिलती तब तक ये एक्टिव नहीं होती. इसका मतलब साफ है कि पैकिंग में रहने के समय में इसकी बैटरी कम नहीं होती है. इसीलिए ये लंबे समय तक इस्तेमाल करने के लिए एक सुरक्षित ऑप्शन भी बन सकती है.
आसानी से मुड़ जाती है
इस बैटरी की एक और खास बात ये है कि इसे आसानी से मोड़ा जा सकता है. हालांकि, अक्सर देखा गया है कि फ्लेक्सिबल बैटरियों को बार-बार मोड़ने से उनकी ताकत कम हो जाती है लेकिन इस बैटरी के साथ ऐसा बिलकुल भी नही है. दरअसल, वैज्ञानिकों ने बैटरी के हिस्सों को एक-दूसरे के ऊपर व्यवस्थित किया है. इस डिजाइन की वजह से बैटरी मुड़ने, खिंचने या ट्विस्ट होने के बाद भी आसानी से काम करने में सक्षम रहती है.
भविष्य में होगा इस्तेमाल
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस रिसर्च की सबसे बड़ी उपलब्धि नमी से चलने वाली सुरक्षित और लचीली बैटरी का तैयार होना है. अगर ये तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है तो भविष्य में ज्यादा सुरक्षित, पर्यावरण के अनुकूल और लंबे समय तक चलने वाली स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों का रास्ता खुल सकता है. इस बैटरी की मदद से कई सारे वियरेबल डिवाइस आसानी से चार्ज हो सकेंगे.
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