आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब कंपनियों के काम करने के तरीके को बदलने का जरिया बन रहा है. भारत की कंपनियां भी अब AI का यूज तेजी से अपने कामकाज में बढ़ा रही हैं. बड़ी संख्या में ऑर्गनाइजेशन इसे अपनी बिजनेस स्ट्रैटेजी का हिस्सा बना रहे हैं, हालांकि इस तकनीक को अपनाने के साथ कंपनियों के सामने डेटा की सुरक्षा, सरकारी नियमों का पालन और पुराने टेक्नोलॉजी सिस्टम को बेहतर बनाने जैसी चुनौतियां भी हैं.

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हाल ही में सामने आई Dell Technologies की एक स्टडी  में बताया गया है कि करीब 70 फीसदी भारतीय कंपनियां AI को अपने काम में प्रेफरेंस दे रही हैं. रिपोर्ट से पता चलता है कि AI का यूज बढ़ रहा है, लेकिन इसे सुरक्षित तरीके से बड़े स्तर पर लागू करना कंपनियों के लिए आसान नहीं है. ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या इससे साइबर हमलों का जोखिम भी बढ़ेगा. 

क्या इससे साइबर हमलों का जोखिम भी बढ़ेगा? 

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जब कंपनियां अपने कामकाज में AI का यूज बढ़ाती हैं, तो उनके पास बड़ी मात्रा में डेटा और डिजिटल सिस्टम होते हैं, जिन्हें सुरक्षित रखना जरूरी है. अगर इन सिस्टम में सुरक्षा की कमियां रह जाती हैं, तो साइबर अपराधी उनका फायदा उठाकर डेटा चुराने या सिस्टम को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं. ऐसे में AI को अपनाने के साथ-साथ डेटा की सुरक्षा और साइबर हमलों से बचने के उपाय करना भी कंपनियों के लिए जरूरी हो जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कंपनियां AI को अपनाने और अपने कामकाज को डिजिटल बनाने के लिए ऐसे टेक्नोलॉजी की मदद लेना चाहती हैं, जो डेटा, तकनीकी ढांचे और सुरक्षा से जुड़े कामों में उनका साथ दे सकें. 

AI के लिए मौजूदा डेटा सेंटर पड़ रहे कम

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की 60 प्रतिशत से ज्यादा कंपनियों का मानना है कि उनके मौजूदा डेटा सेंटर बड़े पैमाने पर AI से जुड़े काम करने में सक्षम नहीं हैं. ऐसे में कंपनियों को अपने तकनीकी स्ट्रक्चर में बदलाव करने और उसे AI की जरूरतों के मुताबिक तैयार करने की जरूरत है. 

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कंपनियों के कामकाज में AI और डेटा की सुरक्षा

भारतीय कंपनियों में AI का यूज बढ़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कंपनियां अब अपने कामकाज में AI और जनरेटिव AI का यूज पहले से ज्यादा कर रही हैं, हालांकि सुरक्षा और नियमों से जुड़ी परेशानियां इसमें रुकावट बन रही हैं. कई कंपनियों ने बताया कि इन समस्याओं के कारण उनके AI प्रोजेक्ट में देरी हुई या उन्हें कुछ समय के लिए रोकना पड़ा. वहीं सर्वे में शामिल ज्यादातर लोगों का कहना है कि AI से होने वाले फायदे और उससे जुड़े खतरों की तैयारी किए बिना कोई नया प्रोजेक्ट शुरू नहीं करना चाहते हैं. 

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