UP News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अब पर्यटन को नए रंग देने जा रही है. पहली बार प्रदेश में जंगल के बीचों-बीच एक भव्य और अनोखा महोत्सव आयोजित किया जाएगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लखीमपुर खीरी जिले के दुधवा टाइगर रिजर्व में इसी साल नवंबर में “दुधवा महोत्सव-25” का आयोजन किया जाएगा. यह महोत्सव राज्य का पहला आवासीय, सांस्कृतिक और वन्यजीव आधारित उत्सव होगा, जिसमें देश-विदेश से दो हजार से अधिक पर्यटकों के शामिल होने की संभावना है

तीन दिन चलेगा महोत्सव

तीन दिन चलने वाले इस महोत्सव में पर्यटक न सिर्फ जंगल की खूबसूरती का आनंद उठा सकेंगे, बल्कि थारू जनजाति की अनोखी संस्कृति, खानपान, हस्तशिल्प और जीवनशैली को भी करीब से जान पाएंगे.

महोत्सव को तीन भागों में बांटा

पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम ने जानकारी दी कि यह महोत्सव राज्य की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधता को दुनिया के सामने लाने का जरिया बनेगा. दुधवा महोत्सव को तीन हिस्सों में बांटा गया है—मेन स्टेज, टेक्नो स्टेज और फोटोग्राफी व लाइफस्टाइल ज़ोन.

ये कलाकार होंगे शामिल

महोत्सव में शुभा मुद्गल, कैलाश खेर, कौशिकी चक्रवर्ती, राम संपत, न्यूक्लिया, टिएस्टो, जैसे नामी कलाकार प्रस्तुति देंगे. वहीं, फोटोग्राफी और लाइफस्टाइल जोन में शेनाज़ ट्रेज़री, बानी जे, सुधीर शिवराम जैसे चर्चित नाम शामिल होंगे.

यहां ठहरेंगे पर्यटक

पर्यटकों के ठहरने के लिए तीन श्रेणियों में 200 से अधिक कैम्पिंग टेंट्स लगाए जाएंगे. खास बात यह है कि वे स्थानीय थारू परिवारों के साथ होमस्टे का भी अनुभव ले सकेंगे, जिससे उन्हें ग्रामीण जीवन की झलक मिलेगी.

ये होंगे आकर्षण

वन्यजीव सफारी, गाइडेड टूर और जैव विविधता का अनुभव इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण होगा. साथ ही, सरकार स्थानीय कलाकारों और हस्तशिल्पियों को मंच देगी और ब्रांडेड मर्चेंडाइज़ जैसे टी-शर्ट्स, मग्स और जैकेट्स से उन्हें आमदनी का जरिया भी उपलब्ध कराएगी.

इन जीवों की प्रजातियाँ हैं प्रमुख

बता दें कि दुधवा टाइगर रिजर्व उत्तर भारत के प्रमुख वन्यजीव स्थलों में से एक है. यह नेपाल सीमा से सटा हुआ है और यहां बाघ, हाथी, गैंडे, दलदली हिरण और सैकड़ों पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं. इस महोत्सव से न केवल दुधवा का नाम राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचेगा, बल्कि इससे स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा.योगी सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश के कम प्रसिद्ध लेकिन समृद्ध प्राकृतिक क्षेत्रों को पर्यटन के नक्शे पर लाया जाए, जिससे रोजगार और पहचान दोनों बढ़ें.