उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को निर्धारित वेशभूषा में काम करने के दौरान होने वाली परेशानियों से राहत देने की तैयारी तेज हो गई है. योगी सरकार ने विभाग में कार्यरत 3.80 लाख से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को हर साल एक अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है. इसके लिए 19 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे. महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारी की जा रही है. जल्द ही अतिरिक्त साड़ी के लिए धनराशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी.

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वर्दी के लिए नहीं करना पड़ेगा इंतजार

महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव लीना जौहरी ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को केंद्रों पर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों से जुड़ी सेवाओं के संचालन की जिम्मेदारी निभानी होती है. इसके लिए उन्हें नियमित रूप से क्षेत्र में भी जाना पड़ता है.

मौजूदा व्यवस्था में सामान्य योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकार के 60:40 के अनुपात में प्रतिवर्ष दो साड़ियां उपलब्ध कराई जाती हैं. अब एक अतिरिक्त साड़ी मिलने से निर्धारित वेशभूषा में ड्यूटी करने के दौरान उन्हें सहूलियत मिलेगी. साड़ी गंदी होने, धुलाई या खराब मौसम के कारण दूसरी वेशभूषा की जरूरत पड़ने जैसी समस्याओं से भी राहत मिलेगी.

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3.80 लाख से अधिक कर्मियों को मिलेगा लाभ

प्रदेश में 1,90,145 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए इतनी ही संख्या में कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के पद स्वीकृत हैं. इस तरह कुल 3,80,290 कर्मियों को अतिरिक्त साड़ी देने का निर्णय लिया गया है. सरकार का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों पर सेवाओं के संचालन को बेहतर बनाने के साथ कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए निर्धारित वर्दी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है. 

19 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय भार

प्रति साड़ी 500 रुपये की दर से इस व्यवस्था पर कुल 19,01,45,000 रुपये खर्च होने का अनुमान है. अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराने का फैसला कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की कार्य संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है. अब महिला एवं बाल विकास विभाग की तैयारी इस व्यवस्था को अमलीजामा पहनाने पर केंद्रित है. धनराशि उपलब्ध होने और वितरण की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद प्रदेशभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को इसका लाभ मिल सकेगा.