Lucknow News: उत्तर प्रदेश सरकार ने आपदा से निपटने की व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए 16वें वित्त आयोग को कई अहम सुझाव भेजे हैं. इन सुझावों में लू, वज्रपात, असमय बारिश, आंधी‑तूफान, सर्पदंश और डूबने की घटनाओं को “राष्ट्रीय आपदा” की सूची में शामिल करने की मांग सबसे बड़ी है. सरकार का तर्क है कि अकेले 2024‑25 में राज्य‑घोषित इन आपदाओं से 4,534 लोगों ने जान गंवाई, जबकि मौजूदा राष्ट्रीय आपदाओं से 176 मौतें हुईं.

सरकार ने राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) और राज्य आपदा मोचन कोष (SDMF) के नियम बदलने का भी प्रस्ताव दिया है. अभी तक SDRF का सिर्फ 10 फीसद पैसा “राज्य‑घोषित आपदाओं” पर खर्च हो सकता है. योगी सरकार इसे 25फीसद करने की माँग कर रही है. इसके साथ ह कोष के अलग‑अलग मदों के बीच रकम इधर‑उधर करने की छूट माँगी गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत पैसा उपलब्ध हो सके.

हर जिले में आपदा नियंत्रण भवन

वर्तमान नियम जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के लिए अलग भवन बनाने की इजाजत नहीं देते. यूपी ने मांग रखी है कि DDMA दफ्तरों के लिए अपनी बिल्डिंग बनाने को SDRF से पैसे खर्च करने की अनुमति मिले. इसके साथ‑साथ प्रशासनिक कामकाज के लिए 1 फीसद तक राशि रखने का भी सुझाव दिया गया है. सरकार का मानना है कि स्थायी ढांचा होने से जिलों में राहत और बचाव की तैयारी तेज होगी.

भारत में आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के बाद SDRF और NDRF (राष्ट्रीय आपदा राहत कोष) बने। इनका मकसद बाढ़, भूकम्प, चक्रवात जैसी बड़ी आपदाओं में राहत देना है. मगर जलवायु बदलाव के कारण अब लू, बिजली गिरना और तेज आँधी जैसी “स्थानीय” घटनाएँ भी जानलेवा बन गई हैं. भारतीय मौसम विभाग के आँकड़ों के मुताबिक, बीते पाँच वर्षों में देश‑भर में वज्रपात से औसतन 2,000 से अधिक लोगों की मृत्यु हर साल होती है, जिनमें बड़ी हिस्सेदारी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड की रहती है.

केंद्र सरकार ने 2021 से “हीट‑एक्शन प्लान” पर राज्य सरकारों के साथ काम शुरू किया  लेकिन अभी यह केवल दिशानिर्देश तक सीमित है. यूपी का ताजा प्रस्ताव इन घटनाओं को आधिकारिक आपदा मानकर राहत‑पैकेज तय करने की मांग करता है.

क्या बदलेगा आम आदमी के लिए?

नई सूची मंजूर होने से लू या बिजली गिरने से जान‑माल का नुकसान होने पर मुआवजा तुरंत मिलेगा.जिलों में DDMA के पास अपना कंट्रोल‑रूम और गोदाम होंगे, जहाँ नाव, सर्च‑लाइट, जनरेटर जैसे सामान पहले से रखे जाएंगे.फंड की अदला‑बदली से कागजी अड़चनें कम होंगी और राहत दल समय पर गांव‑कस्बों तक पहुँचेंगे.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि “आपदा कोई भी हो, जीवन बचाना हमारी पहली जिम्मेदारी है. नए प्रस्ताव लागू हुए तो उत्तर प्रदेश आपदा‑प्रबंधन का नया मॉडल बनेगा.” लगभग दो दशक पहले गोरखपुर में बाढ़ और इंसेफलाइटिस से जूझे योगी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद से राहत‑बचाव को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है. राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति मिलने से प्रदेश में लू‑वज्रपात जैसी घटनाओं में जान‑माल की हानि घटने की उम्मीद है.