साल 2025 अब केवल कुछ दिनों का मेहमान रह गया है, लेकिन जाते-जाते यह साल आस्था, आस्था और डिजिटल दौर के अनोखे संगम के रूप में यादगार बन गया है. 13 जनवरी 2025 से 26 जनवरी 2025 के बीच प्रयागराज के संगम तट पर आयोजित महाकुंभ में 144 साल बाद बना दुर्लभ योग देखने को मिला, जहां 38 दिनों में करीब 66 करोड़ श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई. 

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यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ऐतिहासिक रहा, बल्कि सोशल मीडिया के कारण कई आम लोग और संत रातों-रात देशभर में पहचाने जाने लगे, जिसने महाकुंभ को डिजिटल युग का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बना दिया.

महाकुंभ 2025 और वायरल हुए आम चेहरे

महाकुंभ मेला 2025 में लाखों श्रद्धालुओं के बीच कुछ आम लोग सोशल मीडिया की वजह से खास बनकर उभरे. इंदौर की रहने वाली मोनालिसा भोंसले रुद्राक्ष माला बेचते हुए कैमरे में कैद हुईं और उनकी मासूमियत, सादगी और गहरी आंखों ने लोगों का दिल जीत लिया. 

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कुछ ही दिनों में वे सोशल मीडिया स्टार बन गईं और अब बॉलीवुड में डेब्यू की तैयारी कर रही हैं. इसी तरह उत्तराखंड की हर्षा रिछारिया अपने साध्वी लुक और व्यक्तित्व के कारण वायरल हुईं, जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘महाकुंभ की सबसे सुंदर साध्वी’ कहा गया. उनकी निजी जिंदगी से जुड़ी चर्चाएं भी लगातार सुर्खियों में बनी रहीं.

वायरल संत और नई पहचान

महाकुंभ 2025 में कई संत और बाबा भी सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बने. IIT बाबा, जिनका असली नाम अभय सिंह है और जो आईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्र रह चुके हैं, अपनी उच्च सैलरी वाली नौकरी छोड़कर संन्यास लेने की कहानी के कारण वायरल हुए. 

उनके वीडियो में विज्ञान और अध्यात्म का संतुलन लोगों को आकर्षित करता रहा. इसके अलावा दातुन बेचने वाले आकाश यादव भी चर्चा में आए, जो अपनी गर्लफ्रेंड के सुझाव पर दातुन बेचते दिखे और उनकी सादगी ने लोगों को प्रभावित किया. महाकुंभ में कांटे वाले बाबा, अनाज उगाने वाले बाबा, कबूतर बाबा, चाबी बाबा और रुद्राक्ष बाबा जैसे संतों ने भी लोगों का ध्यान खींचा.

चिमटा बाबा और तकनीक से जुड़े संत

महाकुंभ 2025 के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले संतों में चिमटा बाबा का नाम प्रमुख रहा. इनका असली नाम महाकाल गिरी बाबा है, जो पिछले नौ वर्षों से अपना बायां हाथ ऊपर उठाए हुए हैं और जिनके नाखून उंगलियों से भी बड़े हो चुके हैं. सवाल पूछने पर नाराज होने और चिमटे से मारने के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए. 

वहीं कंप्यूटर बाबा, जिनका असली नाम दास त्यागी है, तकनीक और गैजेट्स में रुचि के कारण पहचाने गए. इन सभी चेहरों ने यह साबित किया कि महाकुंभ 2025 सिर्फ आस्था का पर्व नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया के दौर में पहचान और प्रभाव का भी सबसे बड़ा मंच बन गया.