Uttarakhand Election: यमुनोत्री में हर बार बदला विधायक, 2027 में किसका होगा पलड़ा भारी?
Uttarakhand Assembly Election 2027: यमुनोत्री विधानसभा सीट पर कब्जे के लिए राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं. हर चुनाव में विधायक बदलने वाली इस सीट पर बीजेपी और कांग्रेस दोनों मजबूती दिखा रहे हैं.

उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही राजनीतिक दलों और नेताओं की सरगर्मियां बढ़ गयीं हैं. उत्तराखंड की निर्वाचन सूची के मुताबिक दूसरे नंबर की विधानसभा यमुनोत्री बेहद खास है. उत्तराखंड राज्य के गठन के साथ ही इस विधानसभा ने हर बार विधायक बदला है. इस बार भी सियासी हवा में बदलाव की बयार गूंज रही है.
यमुनोत्री विधानसभा की जो सबसे अलग बात है, वो ये है कि यहां की जनता पार्टी की बजाय उम्मीदवार को चेहरे को देखती है. इस सीट पर 81 हजार मतदाता हैं, जिस कारण जीत और हार का अंतर बेहद मामूली रहता है.
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क्या कहते हैं बीते चुनावों के आंकड़े ?
राज्य गठन से लेकर आज तक इस सीट पर पांच चुनाव हो चुके हैं, जिसमे दो बार उत्तराखंड क्रांति दल , एक बार कांग्रेस , एक बार बीजेपी और एक बार निर्दलीय विधायक ने जीत दर्ज की. इस सीट पर वर्ष 2002 का विधानसभा चुनाव उत्तराखंड क्रांति दल के नाम रहा, जहां क्रांति दल के प्रत्याशी प्रीतम सिंह पंवार को जनता से 9498 वोटों का समर्थन देकर अपना विधायक चुना. वहीं दूसरे स्थान पर रहे केदार सिंह रावत को 7013 वोट मिले , तीसरे स्थान पर बीजेपी प्रत्याशी सुलोचना 5584 वोटों के साथ रहीं.
2007 के विधानसभा चुनाव में जनता का रुझान बदला और पहली बार इस सीट से कांग्रेस ने बाज़ी मारी, कांग्रेस प्रत्याशी केदार सिंह रावत 14484 वोटों के साथ इस क्षेत्र से विधायक चुने गए. दूसरे स्थान पर प्रीतम सिंह पंवार को 11156 वोट मिले. बीजेपी ने इस बार प्रत्याशी बदल कर विमला देवी को मौका दिया. हालांकि नतीजा वही रहा बीजेपी 6283 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रही.
2012 विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस और उत्तराखंड क्रांति दल के बीच जोरदार टक्कर देखने को मिली. जहां UKD प्रत्याशी प्रीतम सिंह पंवार एक बार फिर से 15909 वोटों के समर्थन से क्षेत्र के विधायक चुने गए. दूसरे स्थान पर रहे केदार सिंह रावत को 13313 वोट मिले. जबकि बीजेपी प्रत्याशी जगवीर सिंह 11961 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे.
2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को केदार सिंह रावत की ओर से बड़ा झटका मिला, 2007 के चुनाव में कांग्रेस सीट से विधायक रह चुके केदार सिंह रावत ने इस बात कांग्रेस का हाथ छोड़ कर बीजेपी का दामन पकड़ लिया. बीजेपी का यह समीकरण बेहद कारगर साबित भी हुआ. केदार सिंह रावत 19800 वोट पा कर इस क्षेत्र से बीजेपी के विधायक चुने गए.
कांग्रेस ने केदार सिंह रावत से झटका खाने के बाद इस वर्ष के चुनाव में संजय डोभाल पर भरोसा जताया था. हालांकि संजय डोभाल 13840 वोट ला कर दूसरे स्थान पर रहे. इस वर्ष के चुनाव में एक दिलचस्प बात और देखने को मिली उत्तराखंड क्रांति दल से इस सीट पर दो बार विधायक रह चुके प्रीतम सिंह पंवार ने इस बार यमुनोत्री सीट से चुनाव ना लड़ने का फैसला लिया और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में धनौल्टी विधानसभा से चुनाव लड़ कर धनौल्टी के विधायक चुने गए. जिसका नतीजा यह रहा कि 2017 के विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड क्रांति दल को यमुनोत्री सीट से मात्र 246 वोट ही मिल सके.
2022 के विधानसभा चुनाव में लहर फिर बदली और इस बार बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए. इस वर्ष का चुनावी समीकरण शायद कांग्रेस समझ ना सकी और अपने 2017 के प्रत्याशी संजय डोभाल का टिकट काट कर कांग्रेस ने दीपक बिजलवान पर भरोसा जताया. वहीं बीजेपी ने एक बार फिर केदार सिंह रावत पर दाव खेलते हुए इस वर्ष का चुनाव लड़ा.
हालांकि सबसे चौंकाने वाली बात इस चुनाव में यह रही कि इन दोनों ही पार्टियों को मात देते हुए संजय डोभाल ने निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए 22952 वोटों के साथ इस सीट को जीत लिया. फिलहाल इस सीट पर संजय डोभाल मौजूदा विधायक हैं. 2027 के चुनाव से पहले ही डोभाल और मुख्यमंत्री धामी के बीच मुलाकातें और क्षेत्रीय विकास कार्यों पर चर्चा देखी गई है जो संजय डोभाल और बीजेपी के बीच करीबी के संकेत देती नज़र आ रही हैं.
2027 से पहले हलचल तेज
चुनाव से पहले ही अन्य दलों के कई दिगाज नेता बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. जिसमें राजकुमार ठुकराल और गौरव गोयल जैसे कई नाम शामिल हैं. इस सीट पर चुनाव से पहले कयासों का दौर भी शुरू जो चुका है. मौजूदा विधायक संजय डोभाल और बीजेपी के बीच करीबियों भी देखी जा रही हैं जो यह संकेत भी देती नज़र आ रही हैं कि चुनाव से पहले संजय डोभाल बीजेपी का दामन थाम इस बार बीजेपी की ओर से दावेदारी करें या फिर पार्टी समर्थन के साथ निर्दलीय ही मैदान में उतरने का काम करें.
दीपक बिजलवान भी बीजेपी का दामन थाम चुके हैं. पिछले चुनाव में दीपक पर दांव खेल कर कांग्रेस को शिकस्त का सामना करना पड़ा था. ऐसे में इस सीट पर चुनाव से पहले कयासों का दौर भी शुरू जो चुका है. मौजूदा विधायक संजय डोभाल और बीजेपी के बीच करीबियां भी देखी जा रही हैं जो यह संकेत भी देती नज़र आ रही हैं कि चुनाव से पहले संजय डोभाल बीजेपी का दामन थाम इस बार बीजेपी की ओर से दावेदारी करें या फिर पार्टी समर्थन के साथ निर्दलीय ही मैदान में उतरने का काम करें.
वहीं कांग्रेस से अभी तक कोई नाम सामने ना आने के कारण संशय अभी बरकरार है. यह भी हो सकता है कि कांग्रेस वापस से संजय डोभाल को अपने खेमे में शामिल करना चाहे. अब 2027 के चुनाव में जानता का रुझान किस और होता है यह देखना दिलचस्प होगा.
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