समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चीन में सत्तारूढ़ दल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के नेताओं के राष्ट्रीय स्वयंसेकव संघ के ऑफिस पहुंचने पर प्रतिक्रिया दी है.

Continues below advertisement

सोशल मीडिया साइट एक्स पर अखिलेश ने लिखा कि बीजेपी और उनके संगी-साथी स्वदेशी करते-करते परदेसी हो गये क्या? कहाँ तो चीन से आयात का विरोध कर रहे थे, यहाँ तो साक्षात् स्वागत कर रहे हैं. लगता है बीजेपी के वैचारिक उस्ताद पड़ोसी देश से एक दलीस व्यवस्था का मास्टर क्लास ले रहे हैं. मिलनेवालों को मालूम है क्या कि वो भारत आकर जिससे मिल रहे हैं, उनका काग़ज़ों पर कोई अता-पता नहीं है, वो अनरजिस्टर्ड लोग हैं. उनका कहीं कोई पंजीयन नहीं है. 

'हमको ही धोखा दे दिया, ये अच्छा नहीं किया...'

सपा चीफ ने लिखा कि आज बात मुलाक़ात तक पहुंच गयी, इसका मतलब तैयारी कई सालों से चल रही थी, फिर ये बहिष्कार का ड्रामा क्या बीजेपीई अपने समर्थकों की आँख में धूल झोंकने के लिए कर रहे थे? बीजेपी के उन बेचारे समर्थकों के चेहरे आज कोई जाकर देखे जो चीनी सामान के बहिष्कार के लिए दरवाज़े खटखटाते घूम रहे थे. बेचारे आज बहुत ठगा सा महसूस कर रहे हैं और आपस में व्हाट्सएप मैसेज करके कह रहे हैं, सुना तो था कि भाजापा किसी की सगी नहीं है पर हमको ही धोखा दे दिया, ये अच्छा नहीं किया.

Continues below advertisement

UP SIR: यूपी के इन 10 मुस्लिम बाहुल्य जिलों में कम हो गए वोटर्स? सियासी दलों को आंकड़े करेंगे परेशान!

उन्होंने लिखा कि  अब उनको अपने वैचारिक पूर्वजों की तरह भूमिगत होना पड़ेगा. ये समर्थक ‘रंगे सियार’ की उस कहानी को भूल गये थे, जिसका राज़ एक दिन पानी बरसने पर खुल जाता है.