वाराणसी सहित पूर्वांचल इस बार प्रचंड गर्मी से पूरी तरह बेहाल नजर आ रहा है. जिसकी वजह से आम जनजीवन के साथ-साथ पशु पक्षियों का भी इस भीषण गर्मी में बुरा हाल है. बीते वर्षों की तुलना में इस वर्ष की गर्मी तन मन को पूरी तरह प्रभावित करने वाली रही. 12 से 13 जून के बीच में वाराणसी और पूर्वांचल में प्री मानसून की आहट का अनुमान था लेकिन, बनारस और आसपास के जनपद में कहीं मौसम की मेहरबानी देखने को नहीं मिली. 

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वाराणसी में हर एक जगह पर इस बार गर्मी का साफ असर देखा गया. खासतौर पर अपने दैनिक दिनचर्या के अनुसार सड़कों पर निकलने वाले लोगों ने महसूस किया कि इस बार गर्मी ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त व्यस्त कर दिया है. थोड़े बहुत बादल आए भी लेकिन ऐसी बारिश नहीं हुई, जिससे थोड़ी राहत मिल पाती. जनपद में कहीं भी प्री मानसून की दस्तक नहीं देखने को मिली. 

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काशी को प्री मानसून ने किया निराश

आईएमडी रिपोर्ट के अनुसार 12 से 13 जून के बीच में वाराणसी और आसपास के जनपद में बारिश का अनुमान जताया गया था. प्री मानसून की आहट के बीच लोगों के चेहरे पर उम्मीद की किरण थी. लेकिन, इन दिनों भी बनारस प्रचंड गर्मी से झुलसता नजर आया. 

स्थानीय लोगों की माने तो हर वर्ष की तुलना में इस बार गर्मी ने अधिक बेहाल किया है. लोग इससे हर संभव बचने के उपाय भी अपनाते हुए नजर आए हैं और अब लोगों की सारी उम्मीदें मानसून पर टिकी हुई है. 

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40 से अधिक रहा काशी का तापमान

मई के महीने में अधिकतम पारा 45 डिग्री के पार तो जून में भी कुछ दिनों को छोड़ दिया जाए तो अधिकतम तापमान 40 डिग्री के पार रिकॉर्ड किया जा रहा है. ऐसे में अब काशी वालों की सारी उम्मीदें मानसून पर टिकी हुई है जिस दौरान अच्छी बारिश के बाद लोगों को न सिर्फ गर्मी से राहत मिले बल्कि आम जनजीवन भी सामान्य हो. ऐसे में देखना होगा कि इस बार काशी पर मानसून कितना मेहरबान होता है. 

बता दें कि यूपी मानसून 20-22 जून के आसपास दस्तक दे सकता हैं. लेकिन इस बार भारत में भी अल नीनो के प्रभाव दिखेगा. जिससे मानसून में भी बारिश के कम होने के आसार बन रहे हैं. 

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