उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले पार्टियों में नेताओं के बीच आपसी खींचातानी का दौर शुरू हो चुका है. वाराणसी के दक्षिणी विधानसभा से आने वाली तस्वीर इसी बात की ओर इशारा कर रही है. दरअसल एक कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय विधायक डॉक्टर नीलकंठ तिवारी से नाराज होकर क्षेत्र के भाजपा पार्षद ही बगावती तेवर पर उतर आए हैं. उनका कहना है कि जिम्मेदारियों और कार्य के अनुसार विधायक द्वारा जितनी प्राथमिकता दी जानी चाहिए उतनी नहीं दी जा रही है. और इसकी शिकायत वह संगठन में करेंगे. 

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बीजेपी विधायक के खिलाफ खोला मोर्चा

बनारस की आठ विधानसभा में से दक्षिणी विधानसभा भारतीय जनता पार्टी का सबसे मजबूत किला माना जाता है. दशकों से वहां भारतीय जनता पार्टी के विधायक निर्वाचित हुए हैं. बीते दो बार से 2017 और 2022 में डॉक्टर नीलकंठ तिवारी को दक्षिणी विधानसभा से विधायक चुना गया है. इसी बीच क्षेत्र में एक कार्यक्रम के बाद क्षेत्रीय पार्षद काल भैरव वार्ड के संजय गुजराती ने आरोप लगाया कि वह निर्वाचित पार्षद है लेकिन, उन्हें इतनी प्राथमिकता नहीं दी जा रही है. 

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बीजेपी पार्षद ने कहा कि जो कुछ भी कहना है उनसे कहना चाहिए किसी और से नहीं. संजय ने यहां तक कह दिया कि इसकी शिकायत वह संगठन से करेंगे और कैमरे के सामने ही वह भावुक होकर रोने लगे. अब इसको लेकर दक्षिणी विधानसभा में लोगों के बीच इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि क्या विधायक के खिलाफ क्षेत्रीय लोगों के ही बगावती तेवर शुरू हो चुके हैं. 

प्रधानमंत्री ने थपथपाई थी विधायक की पीठ 

वाराणसी के दक्षिणी से विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी अपने अलग ही अंदाज के लिए भी लोगों के बीच पहचाने जाते हैं. बीते वाराणसी दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ धाम में सभी विधायकों से मुलाकात के दौरान नीलकंठ तिवारी की पीठ थपथपाई थी. 

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बीजेपी विधायक खासतौर पर सहज भाव से अपने विधानसभा में भ्रमण करना, सरकार की योजनाओं को लेकर प्रचार प्रसार में सक्रियता इसके अलावा अपने खिलाफ ऐसे किसी भी आवाज को नीलकंठ बेहद शांत स्वभाव से स्वीकारने के लिए पहचाने जाते हैं. फिलहाल भाजपा पार्षद और विधायक के बीच खिंची सियासी तलवार आगामी विधानसभा चुनाव को कैसे प्रभावित करती है अब इसको लेकर अटकलें शुरू हो चुकी हैं. 

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