उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एंटी करप्शन की टीम ने एक दरोगा और सिपाही को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है, इन पर आरोप है कि इन्होंने दहेज उत्पीड़न के मामले में दर्ज मुकदमें से आरोपियों के नाम निकालने एवज घूंस की मांग की थी. फिलहाल, एंटी करप्शन टीम की इस कार्रवाई से हड़कंप है.

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दरअसल, यह पूरा मामला वाराणसी के सिगरा थाना क्षेत्र से सामने आया है. जहां जनपद के सिगरा थाना अंतर्गत दहेज मामले में एक चौकी इंचार्ज और सिपाही को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. हैरानी की बात यह है कि इससे जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, इसमें चौकी इंचार्ज का नाम दिवाकर मिश्रा और सिपाही का नाम गौरव द्विवेदी बताया जा रहा है.

 

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डीसीपी जोन काशी ने दरोगा और सिपाही को किया सस्पेंड

फिलहाल, एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई के बाद डीसीपी काशी जोन गौरव बंसवाल ने भी मामले में सख्त रुख अपनाया है. डीसीपी काशी जोन गौरव बंसवाल ने रिश्वतकांड में फंसे चौकी इंचार्ज दिवाकर मिश्रा और सिपाही गौरव द्विवेदी पर कार्रवाई करते हुए दोनों ही आरोपियों को निलंबित कर दिया है. हालांकि मामले में उनके परिवार की तरफ से इन्हें बेगुनाह बताया जा रहा है.

क्या है पूरा मामला?

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, चंदौली के अलीनगर थाना क्षेत्र के मुगलचक निवासी प्रहलाद गुप्ता ने एंटी करप्शन टीम से शिकायत की थी कि उनकी पत्नी ममता गुप्ता ने सिगरा थाने में दहेज उत्पीड़न मारपीट समेत अन्य आरोपों में प्राथमिक की दर्ज कराई है. जिसकी विवेचना विद्यापीठ चौकी इंचार्ज शिवाकर मिश्रा के पास है. आरोप है कि चौकी इंचार्ज मुकदमे से नाम निकालने के एवज में एक लाख रुपये की मांग की. उसने धमकी दी कि पैसे नहीं दिए तो और भी धारा लगाकर जेल भेज दिया जाएगा.

बताया गया कि, बाद में किसी तरह 50,000 रुपये घूस देना तय हुआ. इसकी पहली किस्त 20,000 रुपये लेकर प्रहलाद पुलिस चौकी पहुंचा था. चौकी इंचार्ज ने चौकी में मौजूद सिपाही गौरव कुमार द्विवेदी रिश्वत के 20 हजार रुपये देने की बात कही थी. इसके बाद एंटी करप्शन टीम ने चौकी इंचार्ज शिवाकर मिश्रा और सिपाही गौरव कुमार द्विवेदी को गिरफ्तार कर लिया गया. एंटी करप्शन टीम ने रिश्वत के 20 हजार रुपये भी बरामद कर लिए हैं.