उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों से दिसंबर महीने में बारिश का पैटर्न लगातार कमजोर बना हुआ है. बीते महीने बारिश न होने को लेकर भले ही चर्चा हो रही हो, लेकिन मौसम विभाग का कहना है कि इस तरह की स्थिति पहले भी कई बार देखी जा चुकी है. मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के अनुसार पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो दिसंबर में सामान्य या उससे अधिक बारिश केवल एक ही बार दर्ज की गई है.

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मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के निदेशक डॉ. सी.एस. तोमर ने बताया कि वर्ष 2020 से 2025 के बीच दिसंबर महीने में सामान्य या उससे अधिक बारिश सिर्फ वर्ष 2024 में हुई थी. इसके अलावा अन्य वर्षों में दिसंबर में या तो सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई या फिर बारिश बिल्कुल नहीं हुई. उन्होंने स्पष्ट किया कि दिसंबर में कम बारिश कोई असामान्य स्थिति नहीं है और पहले भी ऐसे हालात रहे हैं.

नवम्बर और दिसंबर में शून्य बारिश

आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल नवंबर और दिसंबर दोनों महीनों में बारिश शून्य दर्ज की गई थी. हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति भी पहले देखी जा चुकी है. बदलते मौसम चक्र और पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के आधार पर ही सर्दियों में बारिश और बर्फबारी होती है.

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दो बार सामान्य से कम बारिश

यदि जनवरी महीने की बात की जाए तो पिछले पांच वर्षों में जनवरी-2020 और जनवरी-2022 ऐसे दो वर्ष रहे हैं, जब सामान्य या उससे अधिक बारिश दर्ज की गई. अन्य वर्षों में जनवरी में भी बारिश की मात्रा सामान्य से कम रही. मौसम विभाग के अनुसार सर्दियों में अधिकतर बारिश जनवरी के दूसरे पखवाड़े में देखने को मिलती है.

डॉ. सी.एस. तोमर ने बताया कि वर्तमान समय में पश्चिमी विक्षोभ जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में सक्रिय है. इसका असर उत्तराखंड में जनवरी के दूसरे सप्ताह के दौरान देखने को मिल सकता है. इस दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना जताई जा रही है. उन्होंने कहा कि पहले भी यह देखा गया है कि जनवरी के दूसरे सप्ताह के बाद ही तापमान में गिरावट आती है और बारिश की गतिविधियां तेज होती हैं.

मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव के संकेत मिल सकते हैं. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार सर्दियों में बारिश का यह उतार-चढ़ाव प्राकृतिक चक्र का हिस्सा है और इसे असामान्य मानने की आवश्यकता नहीं है.