Uttarakhand Waqf Board Property: उत्तराखंड में वक्फ बोर्ड की कुल 5,362 संपत्तियाँ दर्ज हैं. ये संपत्तियाँ राज्य के 13 जिलों में फैली हुई हैं और इनमें कृषि भूमि, दुकानें, भवन और प्लॉट जैसे विभिन्न प्रकार की संपत्तियाँ शामिल हैं. इन संपत्तियों की देखरेख और उपयोग की जिम्मेदारी उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के पास है, लेकिन लंबे समय से इनमें से कई संपत्तियों पर अतिक्रमण, अव्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप लगते रहे हैं.
वक्फ बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, सबसे अधिक वक्फ संपत्तियाँ हरिद्वार जिले में हैं, जहां 1,926 संपत्तियाँ दर्ज हैं. इसके बाद देहरादून का नंबर आता है, जहां 1,715 संपत्तियाँ पंजीकृत हैं. अन्य जिलों में उधम सिंह नगर में 939, नैनीताल में 452, पौड़ी गढ़वाल में 128, चंपावत में 60, अल्मोड़ा में 94, टिहरी में 17, बागेश्वर में 13, पिथौरागढ़ में 12, चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में केवल 2-2 संपत्तियाँ ही दर्ज हैं.
जिला-वार वक्फ संपत्तियाँ इस प्रकार हैं: जिला संपत्तियों की संख्या हरिद्वार 1,926 देहरादून 1,715 उधम सिंह नगर 939 नैनीताल 452 पौड़ी गढ़वाल 128 चंपावत 60 अल्मोड़ा 94 टिहरी गढ़वाल 17 बागेश्वर 13 पिथौरागढ़ 12 चमोली 2 रुद्रप्रयाग 2 उत्तरकाशी 2 और कुल योग 5,362 है. इनमें से 3,456 संपत्तियाँ करयोग्य (Revenue Generating) हैं.
संपत्ति का प्रकार – संख्यादुकानें – 2,136कृषि भूमि – 154प्लॉट – 153भवन – 39
वर्तमान में वक्फ संपत्तियों में से कई या तो किराये पर दी गई हैं या फिर अतिक्रमण की चपेट में हैं. कुछ संपत्तियाँ न्यूनतम किराये पर दी गई हैं, जिन्हें बाद में ऊँचे किराये पर उप-लीज पर दिया गया है. इससे वक्फ बोर्ड को राजस्व में भारी नुकसान होता है
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने राज्यभर में अपनी संपत्तियों के निरीक्षण और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. बोर्ड अध्यक्ष की ओर से सभी जिलों के वक्फ अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अतिक्रमण, कम किराए, फर्जी लीज और गैरकानूनी कब्जों की जांच कर रिपोर्ट दें. वक्फ बोर्ड की कोशिश है कि इन संपत्तियों से प्राप्त आय को समाज कल्याण के कार्यों जैसे कि शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबों की सहायता में प्रयोग किया जाए, जैसा कि वक्फ कानून में प्रावधान है.
उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों की संख्या भले ही काफी हो, लेकिन उनका समुचित उपयोग, संरक्षण और पारदर्शिता की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. नया वक्फ बिल इन कमियों को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है. अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया तो वक्फ संपत्तियों से राज्य में मुस्लिम समुदाय के सामाजिक विकास में अहम योगदान सुनिश्चित किया जा सकेगा.
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