उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के दौरान यदि किसी मतदाता की उम्र, नाम, पारिवारिक संबंध या अन्य विवरण में विसंगति सामने आती है, तो उसे दूर करने के लिए निर्वाचन आयोग ने अलग-अलग श्रेणियों के अनुसार प्रक्रिया तय की है. बूथ लेवल अधिकारी (BLO) मौके पर सत्यापन करेंगे और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे.
मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान सामने आने वाली विसंगतियों को दूर करने के लिए निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं. यदि किसी मतदाता और उसके माता-पिता की आयु में 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक का अंतर दर्ज है, तो मतदाता की आयु का प्रमाण और माता या पिता की आयु से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे. यदि माता-पिता उपलब्ध नहीं हैं, तो BLO मौके की स्थिति दर्ज करते हुए अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे.
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इसी प्रकार यदि मतदाता और उसके दादा-दादी या नाना-नानी की आयु में 40 वर्ष से कम का अंतर दर्ज है, तो मामले का सत्यापन BLO की रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा. यदि संबंधित बुजुर्ग जीवित नहीं हैं, तो ग्राम प्रधान या जनप्रतिनिधि के प्रमाणन के बाद सुनवाई की जाएगी.
भाई-बहन की उम्र में कम अंतर होने पर क्या होगा?
यदि दो भाई-बहनों या भाई-बहन की उम्र में नौ महीने से कम का अंतर दर्ज मिलता है, तो दोनों के जन्म प्रमाणपत्र या अन्य वैध दस्तावेजों के आधार पर सत्यापन किया जाएगा. वहीं, यदि एक ही मतदाता के साथ छह से अधिक लोगों की मैपिंग पाई जाती है, तो BLO मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करेंगे और अपनी रिपोर्ट भेजेंगे.
नाम में गलती होने पर ऐसे होगा सुधार
यदि मतदाता के किसी रिश्तेदार के नाम में विसंगति है, तो ऐसा दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा, जिसमें उसका वर्तमान और सही नाम दर्ज हो. वहीं, यदि स्वयं मतदाता के नाम में त्रुटि है, तो 10वीं की अंकतालिका, जन्म प्रमाणपत्र या अन्य वैध दस्तावेजों के आधार पर नाम का सत्यापन किया जाएगा.
उम्र के हिसाब से भी तय हैं दस्तावेज
- निर्वाचन आयोग ने आयु वर्ग के अनुसार भी दस्तावेजों की व्यवस्था तय की है.
- 39 वर्ष या उससे अधिक आयु वाले मतदाता आयोग द्वारा मान्य दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज जमा कर सकेंगे.
- 22 से 38 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं को दो दस्तावेज देने होंगे, जिनमें एक स्वयं का और एक माता या पिता का होगा.
- 19 से 21 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं को तीन दस्तावेज जमा करने होंगे, जिनमें एक स्वयं का, एक माता का और एक पिता का दस्तावेज शामिल होगा.
कौन-कौन से दस्तावेज होंगे मान्य?
निर्वाचन आयोग के अनुसार सत्यापन के दौरान आवश्यकता पड़ने पर निम्न दस्तावेज स्वीकार किए जाएंगे-
- केंद्र या राज्य सरकार, सार्वजनिक उपक्रम (PSU) के कर्मचारी अथवा पेंशनभोगी का पहचान पत्र.
- 1 जुलाई 1987 से पहले सरकार, स्थानीय निकाय, बैंक, डाकघर, एलआईसी या सार्वजनिक उपक्रम की ओर से जारी पहचान पत्र या प्रमाणपत्र।सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाणपत्र.
- वैध पासपोर्ट.
- मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय से जारी 10वीं (मैट्रिक) का प्रमाणपत्र.
- स्थायी निवास प्रमाणपत्र.
- वन अधिकार प्रमाणपत्र.
- ओबीसी, एससी, एसटी अथवा अन्य वैध जाति प्रमाणपत्र.
- राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) से संबंधित दस्तावेज (जहां लागू हो).
- किसी वैधानिक या प्रशासनिक प्रावधान के तहत सरकारी अधिकारी द्वारा जारी परिवार रजिस्टर.
- सरकार की ओर से जारी भूमि या मकान आवंटन प्रमाणपत्र.
- आधार कार्ड.
निर्वाचन आयोग का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज प्रत्येक विवरण का सही और तथ्यात्मक सत्यापन सुनिश्चित करना है, ताकि मतदान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और त्रुटिरहित बन सके.
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