उत्तराखंड सरकार ने बिना मान्यता चल रहे मदरसों के खिलाफ अपना अभियान और तेज कर दिया है. राज्य का मदरसा बोर्ड भंग किए जाने के बाद यह जिम्मेदारी अब उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण, समाज कल्याण विभाग और शिक्षा विभाग की संयुक्त टीम संभाल रही है, जो प्रदेशभर में जांच पड़ताल में जुटी है.

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अभी तक कुल 452 मदरसों की जांच पूरी हो चुकी है. जिसमें से नियमों की अनदेखी करते पाए जाने पर 17 मदरसों को सील किया जा चुका है. इनमें ऊधमसिंह नगर सबसे आगे है, जहां 8 मदरसे सील किए गए हैं. इसके बाद हरिद्वार और नैनीताल में 4-4 और देहरादून में 1 मदरसे पर ताला लगाया गया है.

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मान्यता के लिए 30 सितंबर आखिरी तारीख

जो मदरसे नियमानुसार मान्यता हासिल करना चाहते हैं, उनके लिए सरकार ने 30 सितंबर तक आवेदन करने की मोहलत दी है. अब तक 200 संस्थानों ने इसके लिए आवेदन कर दिया है, जिनमें से 35 को मंजूरी भी मिल चुकी है. सरकार ने साफ किया है कि किसी मदरसे के बंद होने मात्र से प्रबंधन अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो जाएगा. बच्चों की शिक्षा बाधित न हो, इसके लिए संचालकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें आसपास के किसी अल्पसंख्यक स्कूल में दाखिला दिलाया जाए, और इसकी सूचना प्रशासन को भी देनी अनिवार्य होगी.

एक जुलात से मदरसा बोर्ड हो चुका समाप्त

यहां बता दें कि उत्तराखंड सरकार ने इसी साल एक जुलाय से मदरसा बोर्ड को पूरी तरह समाप्त कर दिया था, इसकी जगह अब अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण लागू कर दिया गया है. मदरसे अब इसी के तहत संचालित हो रहे हैं.इसके साथ ही इनका पाठ्यक्रम भी निर्धारित किया गया है. जिसमें दीनी तालीम के साथ आधुनिक शिक्षा भी दी जाएगी. अब सभी मदरसों को इसी के तहत ही मान्यता लेनी होगी, इसीलिए ही 30 सितंबर की तारीख सुनिश्चित की गयी है. इसके साथ ही यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के भविष्य को देखते फैसला लिया गया है.

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