उत्तराखंड में बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से जनजीवन अस्त-व्यस्त है, चार दिनों से हो रही लगातार हो रही बारिश ने सभी को हलाकान कर दिया है. इसी बीच मौसम विभाग ने आज 20 अगस्त के लिए भी छह जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिसके चलते पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और नदी नालों में अचानक उफान आने का खतरा बना हुआ है. वहीं, देहरादून में एहतियातन आंगनबाड़ी केंद्रों से लेकर स्कूलों तक सबको बंद रखने के दिशा निर्देश जारी किए गए हैं.

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टिहरी डैम का जलस्तर वार्निंग लेवल के पार टिहरी बांध का जलस्तर अब चेतावनी रेखा को पार कर चुका है. मौसम विभाग का अनुमान है कि भारी बारिश के चलते बांधों और बैराजों से पानी छोड़े जाने की मात्रा बढ़ सकती है जिससे प्रदेश की प्रमुख नदियों और उनकी सहायक धाराओं में जलस्तर और तेज़ी से चढ़ सकता है.

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पिछले 24 घंटे में देहरादून में सबसे ज्यादा बारिश

मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 24 घंटों में सबसे भारी बारिश देहरादून के मालदेवता क्षेत्र में दर्ज की गई, जहां 83 मिलीमीटर पानी बरसा है. इसके बाद सहस्रधारा स्थित आईटीआई में 65 मिलीमीटर और हल्द्वानी में साढ़े पैंतालीस मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई. इस पूरे मानसून सीजन में अब तक प्राकृतिक आपदाओं के चलते 33 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. 

भूस्खलन ने तोड़ी ट्रैफिक व्यवस्था की कमर

वहीं, बारिश का असर प्रदेश की सड़कों पर भी दिखा है, भूस्खलन के चलते प्रदेशभर में आवागमन की कमर टूट चुकी है. मौजूदा स्थिति में प्रदेश की 124 सड़कें बंद पड़ी हैं, जिनमें एक राष्ट्रीय राजमार्ग, दो राजमार्ग, एक अन्य जिला मार्ग के अलावा लोक निर्माण विभाग की 28 और पीएमजीएसवाई आरडब्ल्यूडी की 92 सड़कें शामिल हैं.

पिथौरागढ़ में भूस्खलन की वजह से 24 सड़कें बंद

वहीं, सबसे बुरा हाल पिथौरागढ़ जिले का है, जहां अकेले 24 सड़कें ठप पड़ी हैं. इसके साथ ही चमोली में 20, नैनीताल में 18, बागेश्वर में 11, देहरादून-पौड़ी और टिहरी में दस-दस, उत्तरकाशी में नौ, रुद्रप्रयाग में आठ और अल्मोड़ा में चार सड़कें बारिश और भूस्खल की वजह से बंद बताई जा रही हैं.

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