देहरादून के शिक्षा निदेशालय में हुई मारपीट की आग अब पूरे उत्तराखंड में फैल गई है. प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय नौडियाल पर रायपुर विधायक उमेश काऊ और उनके समर्थकों द्वारा कथित हमले के विरोध में सोमवार को प्रदेश के करीब 38 हजार शिक्षक विरोध करते नजर आए ,राज्य के 15 हजार से अधिक प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर काम का बहिष्कार किया और साफ कह दिया, अब बहुत हो चुका.

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शिक्षकों और कर्मचारियों ने सरकार को दो टूक चेतावनी दे दी है. अगर दो दिन के भीतर दोषियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो 25 फरवरी से नगर पंचायत से लेकर राज्य सचिवालय तक सब कुछ ठप कर दिया जाएगा. हालांकि शिक्षक संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया कि बोर्ड और वार्षिक परीक्षाओं पर इसका असर नहीं पड़ेगा. छात्रों का नुकसान उन्हें मंजूर नहीं. परीक्षाएं सुचारू चलती रहेंगी, लेकिन बाकी सारा विभागीय कामकाज अगले एक हफ्ते तक ठप रहेगा.

संयुक्त मोर्चे ने संभाली कमान

इस आंदोलन को एकजुट धार देने के लिए राज्यभर के अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों ने मिलकर एक 'संयुक्त मोर्चा' बना लिया है. राम सिंह चौहान को अध्यक्ष और मुकेश बहुगुणा को महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है. उत्तराखंड सचिवालय संघ से लेकर फार्मासिस्ट एसोसिएशन, डिप्लोमा इंजीनियर संघ और अनुसूचित जाति-जनजाति शिक्षक संघ तक. लगभग हर बड़े संगठन ने इस मोर्चे में अपना हाथ मिला लिया है.

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तीन मांगेंसीधी और साफ

आंदोलनकारियों की मांगें किसी पेचीदा राजनीतिक एजेंडे से नहीं, बल्कि बुनियादी सुरक्षा की भावना से उपजी हैं. पहली मुख्य सचिव स्तर पर वार्ता हो और सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए एक सख्त एसओपी जारी की जाए. दूसरी सभी सरकारी दफ्तरों में पुलिस सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. तीसरी और सबसे अहम दोषियों को दो दिन के भीतर गिरफ्तार किया जाए.

मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासनसंगठन अभी भी सतर्क

मामले की गूंज मुख्यमंत्री तक पहुंची और एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने भी गया. सीएम की तरफ से जांच और कार्रवाई का आश्वासन मिला, लेकिन संगठनों ने साफ कह दिया कि आश्वासन से काम नहीं चलेगा. जब तक जमीन पर कार्रवाई नहीं दिखती, दो दिन का कार्य बहिष्कार जारी रहेगा और आगे की रणनीति नतीजों के आधार पर तय होगी.