अगर आपके मोहल्ले की गली में कचरा पड़ा रहता है, नाली बजबजाती है या सार्वजनिक शौचालय की हालत देखकर आपका मन खराब हो जाता है, तो अब सिर्फ शिकायत करने से काम नहीं चलेगा. अब आपके पास सिस्टम को आईना दिखाने का एक सीधा और आसान रास्ता है, बस एक QR कोड स्कैन करें और अपनी बात दर्ज कराएं.
उत्तराखंड सरकार ने 'स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26' को लेकर एक अहम बदलाव किया है. इस बार शहरों की स्वच्छता रैंकिंग तय करने में सरकारी टीमों की निरीक्षण रिपोर्ट से ज्यादा वजन उस आम आदमी की राय (Citizen Feedback) को दिया जाएगा, जो हर रोज उन्हीं सड़कों और बाजारों से गुजरता है.
यूपी में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मायावती को सताई ब्राह्मणों की चिंता, कहा- बीजेपी के युवा नेता...
107 निकायों में एक साथ शुरू होगा 'QR कोड' अभियान
राज्य के सभी 107 शहरी निकायों (नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत) में यह फीडबैक अभियान एक साथ चलाया जाएगा. देहरादून नगर निगम इसकी अगुवाई कर रहा है. इसके तहत बाजारों की दुकानों के बाहर, स्कूलों के नोटिस बोर्ड पर, सरकारी दफ्तरों की दीवारों पर और पार्क जैसे सार्वजनिक स्थानों पर QR कोड चिपकाए जाएंगे. कोई भी नागरिक अपने स्मार्टफोन से इस कोड को स्कैन कर सीधे अपना फीडबैक दर्ज कर सकेगा.
खानापूर्ति नहीं, इस बार पूछे जाएंगे 13 अहम सवाल
पिछले साल के स्वच्छता सर्वेक्षण में नागरिकों से 10 सवाल पूछे गए थे, लेकिन इस बार यह संख्या बढ़ाकर 13 कर दी गई है. ये सवाल सिर्फ खानापूर्ति के लिए नहीं हैं. इनके जरिए शहर की साफ-सफाई, घर-घर कचरा संग्रह की नियमितता, सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति और स्थानीय निकाय की कार्यप्रणाली जैसे ठोस और जमीनी मुद्दों पर जनता की राय ली जाएगी. यानी अगर आपके इलाके में सफाईकर्मी हफ्ते में दो बार ही आता है, तो आप सीधे इसकी शिकायत कर सकते हैं.
रैंकिंग में सरकारी रिपोर्ट से ज्यादा भारी होगी 'जनता की राय'
अब तक स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंकिंग काफी हद तक सरकारी टीमों के दौरों और निरीक्षण पर निर्भर रहती थी. लेकिन अक्सर देखा जाता था कि सरकारी दौरों से ठीक पहले रातों-रात सफाई हो जाती है और बाद में शहर का फिर वही हाल हो जाता है. इस 'खेल' को खत्म करने के लिए इस बार नीति बदली गई है. नगर निकायों का स्पष्ट कहना है कि इस बार सिटीजन फीडबैक ही किसी शहर की असली तस्वीर सामने रखेगा. जितने ज्यादा लोग फीडबैक देंगे, रैंकिंग का आकलन उतना ही सटीक होगा.
आपकी एक क्लिक तय करेगी शहर का बजट और विकास
यह स्वच्छ सर्वेक्षण सिर्फ एक प्रतियोगिता भर नहीं है. इसके नतीजे ही यह तय करते हैं कि किस शहर को केंद्र सरकार की ओर से स्वच्छता के लिए पुरस्कार और शहर के विकास के लिए अतिरिक्त बजट मिलेगा. इसलिए नागरिकों का एक छोटा सा फीडबैक उनके शहर की तकदीर बदल सकता है.
यूपी पंचायत चुनाव से पहले धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला रेड्डी की CM योगी से मुलाकात, हलचल तेज
