उत्तराखंड के रामनगर वन प्रभाग के कोसी रेंज अंतर्गत बेलगढ़ बीट क्षेत्र में एक व्यक्ति की मौत के बाद इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है. घटना के बाद वन विभाग की निगरानी में सामने आया है कि घटनास्थल के आसपास एक बाघिन अपने दो शावकों के साथ सक्रिय रूप से घूम रही है. वहीं बाघिन और उसके शावकों को पकड़ने के लिए वन विभाग ने वाइल्डलाइफ चीफ से अनुमति मांगी है. जैसे ही अनुमति मिलती है क्षेत्र में पिंजरे लगा दिए जाएंगे और ट्रैंक्यूलाइज की कार्रवाई भी शुरू कर दी जाएगी.

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बाघिन को बेहोश कर किया जाएगा रेस्क्यू

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बाघिन और उसके शावकों को बेहोश कर सुरक्षित स्थान पर ले जाया जाएगा. इसके बाद मृतक के डीएनए सैंपल का मिलान किया जाएगा, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि व्यक्ति पर हमला किस वन्यजीव ने किया था. यदि जांच में यह पुष्टि होती है कि कैमरा ट्रैप में दिखाई दे रही बाघिन ही हमले के लिए जिम्मेदार है, तो उसे उसके दोनों शावकों सहित रेस्क्यू सेंटर भेज दिया जाएगा, जहां वे आजीवन संरक्षण में रहेंगे.

घटना शनिवार शाम की है, जब हल्द्वानी बाईपास पुल के समीप बेलगढ़ बीट क्षेत्र में लकड़ी लेने जंगल जा रही महिलाओं ने खून से सने कपड़े देखे, जिसके बाद उन्होंने इसकी सूचना वन विभाग को दी. मौके पर पहुंची टीम को खून के निशान और व्यक्ति को घसीटकर जंगल के भीतर ले जाने के स्पष्ट सबूत मिले. रविवार सुबह पुलिस के साथ संयुक्त सर्च अभियान चलाया गया, जिसमें जंगल के भीतर लगभग डेढ़ किलोमीटर अंदर व्यक्ति का सिर बरामद किया गया था.

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कैमरा ट्रैप के माध्यम से मूवमेंट पर रखी जा रही नजर

सर्च और निगरानी के दौरान वन विभाग की टीम ने घटनास्थल के आसपास बाघिन और उसके दोनों शावकों की मौजूदगी दर्ज की है. एसडीओ अंकित बडोला ने बताया कि पूरे क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है और संवेदनशील स्थानों पर लगातार नजर रखी जा रही है. कैमरा ट्रैप और फील्ड स्टाफ के माध्यम से मूवमेंट पर नजर भी रखी जा रही है. एसडीओ के अनुसार, शावकों का शारीरिक आकार बताता है कि उनकी उम्र लगभग छह महीने से एक साल के बीच हो सकती है.

शावकों की मौजूदगी के कारण बाघिन का व्यवहार अधिक सतर्क और आक्रामक हो सकता है, जिससे खतरा और भी बढ़ जाता है. घटना के बाद सुरक्षा के मद्देनजर हल्द्वानी मार्ग से सटे क्षेत्र में लगे फड़ और ठेलों को हटाया गया है. साथ ही वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं से जंगल में प्रवेश न करने की अपील की है. वहीं वन अधिकारी लगातार लोगों को सतर्क रहने और वन विभाग के निर्देशों का पालन करने की सलाह दे रहे हैं.