देवभूमि उत्तराखंड में अवैध कब्ज़ों और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार निर्णायक मोड में नजर आ रही है. राज्य में लगातार चल रहे बुलडोज़र एक्शन के जरिए सरकार ने साफ संदेश दे दिया है कि अवैध कब्ज़ा, कानून उल्लंघन और देवभूमि की पहचान से खिलवाड़ करने वालों के लिए अब कोई जगह नहीं है.

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सीएम पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश में बीते कुछ वर्षों से सख्त भू-कानून, नकल-विरोधी कानून, दंगारोधी प्रावधानों और अवैध अतिक्रमण के खिलाफ विशेष अभियानों के जरिए कार्रवाई की जा रही है. सरकार का दावा है कि इन कदमों का उद्देश्य किसी वर्ग विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सरकारी भूमि, सार्वजनिक संपत्ति और राज्य के सामाजिक-सांस्कृतिक ताने-बाने की रक्षा करना है.

गदरपुर में सरकारी बाग़ की जमीन कराई मुक्त

इसी क्रम में उधम सिंह नगर जिले के गदरपुर क्षेत्र में सरकारी बाग की जमीन पर बने एक अवैध निर्माण को तड़के सुबह करीब पांच बजे प्रशासन द्वारा ध्वस्त कर दिया गया. प्रशासन के अनुसार, संबंधित पक्ष को पहले नोटिस जारी कर दो सप्ताह का समय दिया गया था, लेकिन वैध दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं किए गए. तय समय सीमा पूरी होने के बाद नियमानुसार यह कार्रवाई की गई. इसके अलावा देहरादून के हरिद्वार रोड क्षेत्र में भी हाल ही में एक अवैध संरचना पर बुलडोज़र चला.

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570 से अधिक अवैध अतिक्रमण हटवाए

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, धामी सरकार के कार्यकाल में अब तक प्रदेशभर में 570 से अधिक अवैध संरचनाओं को हटाया जा चुका है. इसके साथ ही 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है. प्रशासन का कहना है कि यह अभियान केवल अवैध ढांचों को गिराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सरकारी जमीन को दोबारा जनता और विकास कार्यों के लिए उपलब्ध कराना है.

मुक्त कराई गई भूमि का उपयोग भविष्य में पर्यटन विकास, आधारभूत ढांचे के विस्तार, सार्वजनिक सुविधाओं और युवाओं के लिए रोजगार सृजन से जुड़े प्रोजेक्ट्स में किया जाएगा. सरकार का कहना है कि उत्तराखंड की भूमि पर किसी भी तरह का अवैध कब्ज़ा, चाहे वह किसी भी आड़ में क्यों न किया गया हो, बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

जारी रहेगी कार्रवाई

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कई बार दोहरा चुके हैं कि देवभूमि की पहचान, संस्कृति और जमीन की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. कानून सबके लिए समान है और नियमों से ऊपर कोई नहीं है. प्रशासनिक कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और अवैध कब्ज़ों के खिलाफ सख्ती से निपटा जाएगा.