Uttarakhand News: प्रदेश में भूमिधरी का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है. विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कांग्रेस विधायकों ने नियम 58 के तहत सरकार से इस मसले पर जवाब मांगा. कांग्रेस विधायकों का कहना है कि यह मामला वर्षों से लंबित है, जिससे स्थानीय लोगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. खासतौर पर सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार जानबूझकर इस मुद्दे को लटका रही है, जबकि स्थानीय जनता के हक में जल्द फैसला लिया जाना चाहिए.
विधानसभा में कांग्रेस ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा. कांग्रेस विधायकों ने कहा कि प्रदेश के स्थानीय निवासियों को भूमिधरी का अधिकार नहीं मिलने के कारण वे न तो अपनी जमीन का सही इस्तेमाल कर पा रहे हैं और न ही किसी प्रकार के ऋण या अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ ले पा रहे हैं. उनका कहना है कि सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और स्थानीय लोगों को उनका हक देना चाहिए.
भूमिधरी का मुद्दा जनता के लिए महत्वपूर्ण- विपक्षविपक्ष के अनुसार, यह मुद्दा सिर्फ आर्थिक पहलू से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और विकास के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द इस विषय पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो जनता का आक्रोश बढ़ सकता है और सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.
भाजपा विधायक विनोद चमोली ने कहा कि, "भूमिधरी का मामला निश्चित रूप से गंभीर है और सरकार इस पर गहनता से विचार कर रही है. हम इस मुद्दे को हल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और जल्द ही कोई न कोई समाधान निकाला जाएगा. सरकार की मंशा है कि सभी वर्गों को न्याय मिले और जो भी नीति बने, वह प्रदेश के हित में हो."
प्रदेश सरकार इस विषय पर काम कर रही है- भाजपा विधायकउन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार इस विषय पर कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर विचार कर रही है, ताकि भविष्य में कोई विवाद न उत्पन्न हो. उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वे इस विषय पर राजनीति करने के बजाय सरकार के साथ मिलकर इसका हल निकालने में सहयोग करें.
वहीं, उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि, "भूमिधरी का मामला वर्षों से लटका हुआ है, लेकिन सरकार इसे लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं ले रही है. यह मुद्दा लगातार स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है, इसलिए इसे ज्यादा समय तक लंबित नहीं रखा जा सकता. सरकार को गंभीरता दिखानी चाहिए और जल्द से जल्द स्थानीय लोगों को भूमिधरी का अधिकार देना चाहिए."
भूमिधरी अधिकार न होने से जनता परेशानउन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार केवल आश्वासन देने में लगी हुई है, जबकि जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है. कापड़ी ने कहा कि यदि सरकार जल्द कोई निर्णय नहीं लेती, तो कांग्रेस इस मुद्दे पर बड़े आंदोलन की तैयारी करेगी.
स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि बिना भूमिधरी के अधिकार के वे अपनी जमीन पर न तो निर्माण कार्य कर सकते हैं और न ही बैंकों से कृषि या मकान निर्माण के लिए ऋण प्राप्त कर सकते हैं. ऐसे में उन्हें कई आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी इस बात से परेशान हैं कि वे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं.
राजनीतिक विश्लेषकों ने क्या कहा?राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे को लेकर प्रदेश में बड़ा सियासी विवाद खड़ा हो सकता है. कांग्रेस इस मुद्दे को 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले भुनाने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा सरकार इस पर संतुलित निर्णय लेने की रणनीति बना रही है.
भूमिधरी का मामला संवेदनशील होने के कारण सरकार इस पर जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेना चाहती. हालांकि, विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है कि इस विषय पर शीघ्र कार्रवाई की जाए. देखना यह होगा कि सरकार इस पर कब और क्या फैसला लेती है, ताकि स्थानीय लोगों की समस्या का समाधान हो सके.
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