उत्तराखंड में डिजिटल जनगणना 2027 के पहले चरण के तहत भवन गणना का कार्य आज 25 अप्रैल से शुरू हो गया है. इस अभियान के तहत प्रदेशभर में 20 हजार से अधिक प्रशिक्षित कर्मचारियों को तैनात किया गया है, जो घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करने का काम करेंगे. यह अभियान राज्यभर में व्यापक स्तर पर चलाया जा रहा है और इसे पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित किया जा रहा है.

जनगणना की प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से होगी संचालित

इस बार जनगणना की प्रक्रिया पहले से अलग डिजिटल माध्यम से संचालित होगी. फील्ड में तैनात प्रगणक मोबाइल एप की मदद से हर भवन का विवरण दर्ज करेंगे. इसके लिए राज्य को हजारों हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स में विभाजित किया गया है और प्रत्येक क्षेत्र का डिजिटल मानचित्र पहले ही तैयार कर लिया गया है.

प्रगणक इन्हीं डिजिटल मानचित्रों के आधार पर सर्वे करेंगे, जबकि सुपरवाइजर स्तर पर दर्ज किए गए डेटा का सत्यापन किया जाएगा. पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने के कारण डेटा की निगरानी रियल टाइम में की जा सकेगी, जिससे पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित होगी. अधिकारियों के अनुसार यह अभियान राज्य की वास्तविक जनसंख्या, भवनों और बुनियादी ढांचे से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसके आधार पर भविष्य की विकास योजनाओं को जमीन पर लागू करने में मदद मिलेगी.

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प्रगणक को गलत जानकारी देने पर मुकदमा दर्ज

जनगणना निदेशक ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति प्रगणक को गलत जानकारी देता है, भवन पर नंबर अंकित करने से रोकता है या सर्वे कार्य में किसी भी तरह की बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ जनगणना अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है.

इसे राष्ट्रीय महत्व का कार्य बताते हुए प्रदेशवासियों से अपील की गई है कि वे प्रगणकों को सही और सटीक जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि राज्य की वास्तविक स्थिति का सही आकलन हो सके और भविष्य की योजनाएं जमीनी हकीकत के आधार पर तैयार की जा सकें.

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