उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हल्द्वानी और बागेश्वर के दो मृतकों के शव पोस्टमार्टम के बाद आपस में बदल दिए गए, जिससे दोनों परिवारों में हड़कंप मच गया.

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जानकारी के अनुसार, दोनों मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए हल्द्वानी स्थित मोर्चरी में लाए गए थे. पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कर्मचारियों की लापरवाही के चलते शवों की पहचान ठीक से सुनिश्चित नहीं की गई और उन्हें गलत परिजनों को सौंप दिया गया. परिवार वाले अपने-अपने मृतक का अंतिम संस्कार करने की तैयारी में थे, तभी इस गंभीर गड़बड़ी का खुलासा हुआ.

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टैगिंग और पहचान प्रक्रिया में हुई चूक

बताया जा रहा है कि जब परिजनों ने शव को ध्यान से देखा, तो उन्हें शक हुआ कि यह उनके अपने व्यक्ति का शव नहीं है. इसके बाद हंगामा खड़ा हो गया और मामला प्रशासन तक पहुंचा. जांच में सामने आया कि मोर्चरी में कार्यरत कर्मचारियों ने टैगिंग और पहचान की प्रक्रिया में बड़ी चूक की, जिसके कारण यह स्थिति पैदा हुई.

स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस घटना से दोनों परिवारों को मानसिक आघात पहुंचा है. एक ओर जहां वे अपने प्रियजन के निधन के दुख से जूझ रहे थे, वहीं दूसरी ओर इस तरह की लापरवाही ने उनकी पीड़ा को और बढ़ा दिया. लोगों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं.

अधिकारियों ने दिए जांच का आदेश

प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं. संबंधित अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे. साथ ही, शवों की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए नई गाइडलाइंस लागू करने की बात भी कही जा रही है.

शवों की अदला-बदली ठीक करने में जुटा प्रशासन

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है. उनका कहना है कि इस तरह की लापरवाही किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती, खासकर जब मामला मृतकों और उनके परिजनों की संवेदनाओं से जुड़ा हो. फिलहाल, प्रशासन शवों की अदला-बदली को ठीक कर सही परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया में जुटा है. बहरहाल, इस घटना ने एक बार फिर सरकारी तंत्र की लापरवाही को उजागर कर दिया है, जिससे आम जनता का भरोसा प्रभावित हो रहा है.

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