मानसून के आगमन से पहले उत्तराखंड सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में है. राज्य स्तर पर आयोजित मॉक ड्रिल के माध्यम से आपदा प्रबंधन तंत्र की तैयारियों का जायजा लिया गया.

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राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र से पूरे प्रदेश पर लगातार नजर रखी जा रही है. मौसम की बदलती स्थिति, संवेदनशील क्षेत्रों और संभावित खतरों की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जा रही है. आधुनिक तकनीक और संचार व्यवस्था को मजबूत किया गया है.

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विभागों में बढ़ाया गया समन्वय

सभी संबंधित विभागों को 24×7 अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं. आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो, इसके लिए विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दिया गया है. 

पिछले अनुभवों से सीखकर तैयारियां

सरकार ने पिछले तीन वर्षों की आपदाओं से मिले अनुभवों को ध्यान में रखते हुए तैयारियों को और मजबूत किया है. मॉक ड्रिल, प्रशिक्षण कार्यक्रम और समीक्षा बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जा रही हैं.

संवेदनशील क्षेत्रों में अग्रिम तैनाती

मानसून के दौरान संभावित जोखिम को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में जेसीबी, एंबुलेंस, मेडिकल टीमें, खाद्य सामग्री और बचाव उपकरण पहले से तैनात किए गए हैं. प्रभावित क्षेत्रों का त्वरित दौरा कर राहत कार्यों की निगरानी करने की व्यवस्था भी की गई है.

न्यूनतम नुकसान का लक्ष्य

सरकार का उद्देश्य आपदा आने के बाद सिर्फ राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि पूर्व तैयारी के जरिए नुकसान को न्यूनतम रखना है. उत्तराखंड की आपदा प्रबंधन व्यवस्था अब अधिक आधुनिक, सशक्त और तेज प्रतिक्रिया देने वाली बन चुकी है. प्रशासन का मानना है कि मॉक ड्रिल और लगातार समीक्षा से किसी भी चुनौती से निपटने की क्षमता बढ़ी है. मानसून के इस मौसम में राज्य की सतर्कता और तैयारियां सकारात्मक संकेत दे रही हैं.

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