उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं का कारण उत्तराखंड की हिमालय में बनी झीलें और ग्लेशियर भी माने जा रहे है जून 2013 में केदारनाथ में आई जल प्रलयकारी आपदा चोराबारी क्षेत्र में झीलों और ग्लेशियर के फटने से आई थी. इसके प्रमाण साफ-साफ मिलें हैं, यही कारण है कि उत्तराखंड सरकार नेशनल ग्लेशियल लेक ऑउटब्रस्टफ़्लड्स (GLOF) रिस्कमिटिगेशन प्रोग्राम (NGRMP) के अन्तर्गतवैथेमैट्री/स्थलीय सर्वेक्षण कर गंगोत्री क्षेत्र केदारताल का बारीकी से जियोलॉजिकलसर्वे किया जाएगा जो 19 अक्टूबर से 25 अक्टूबर के बीच प्रस्तावित है.

जिससे भविष्य में आने वाली आपदाओं सेबचा जा सके या फिर उससे होने वाले नुकसान को कम किया जा सके.उत्तरकाशी के गंगोत्री धाम से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित केदारताल का NGRMP के अन्तर्गतवैथेमैट्री/स्थलीय सर्वेक्षण होगा. केदारताल समुद्र तल से 4,750 मीटर (15,584 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है, जिसकी दूरी गंगोत्री से करीब 15 किलोमीटर है, केदारताल के ठीक नीचे गंगोत्री धाम है जिसमें आबादी भी रहती है. भविष्य में धाम को कोई खतरा न हो इसको लेकर सर्वे किया जा रहा है.

जानकारी के अनुसार उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण (यू०एस०डी०एम०ए०) एवं बीरबलसाहनीपुरावनस्पतिविज्ञान संस्थान (BSIP), लखनऊ द्वारा एवं स्थानीय जिला प्रशासन के सहयोग से इस माह सर्वेक्षण हेतु केदारतालएक्सपीडिशन जाना प्रस्तावित है. जो केदारताल में पानी की गहराई और चौड़ाई का जायजा लेंगे और भविष्य में किसी प्रकार कीआपदाकेखतरेकाभीनिरीक्षणकरेंगे.

बता दें कि GLOF इसी झीलों का सर्वे करता है जहां से आपदा का खतरा हो सकता है. जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया बताया कि उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण (यू०एस०डी०एम०ए०) एवं बीरबलसाहनीपुरावनस्पतिविज्ञानसंस्थान (BSIP),लखनऊ और जिला प्रशासन केदारताल की डाइमेंशन और गहराई की डिटेलसर्वे करेगी. उत्तराखंड का हिमालय बहुत ही संवेदनशील है जहां पर कई प्रकार की झीलें और ग्लेशियर हैं हिमालय क्षेत्र में हो रहे हलचल के कारण कई बार आउटबर्स्टफ्लड से भारी नुकसान हुआ है. यही कारण है कि सरकार इन संवेदनशील झीलों और ग्लेशियरों का सर्वेक्षण का सही-सही आकलन लगाया जाए.