नैनीताल हाईकोर्ट ने UKSSSC द्वारा 751 पदों की भर्ती में राज्य आंदोलनकारी कोटे के तहत चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी करने पर अंतरिम रोक लगा दी है. कोर्ट ने राज्य सरकार के 1 जुलाई 2026 के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. याचिकाकर्ता सक्षम चौहान (हरिद्वार) ने दावा किया कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद पात्रता नियमों में बदलाव गलत है.

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जस्टिस पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने राज्य सरकार और UKSSSC से पूछा कि भर्ती विज्ञापन जारी होने और आवेदन की अंतिम तिथि बीत जाने के बाद शासनादेश किस कानून या नियम के तहत जारी किया गया. कोर्ट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद पात्रता शर्तों में बदलाव सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के विरुद्ध है.

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16 सितंबर को होगी अगली सुनवाई  

हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को 6 सप्ताह के अंदर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं. 15 जुलाई को लगाई गई रोक को अगली सुनवाई तक जारी रखा गया है. मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 को होगी. तब तक राज्य आंदोलनकारी कोटे के तहत नियुक्तियां नहीं हो सकेंगी.

भर्ती प्रक्रिया के बीच नियम बदलने पर आपत्ति

उत्तराखंड हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया कि 4 नवंबर 2024 को जारी विज्ञापन के बाद आवेदन की अंतिम तिथि बीत चुकी थी. इसके बावजूद सरकार ने बाद में कुछ अभ्यर्थियों को राज्य आंदोलनकारी प्रमाणपत्र के आधार पर दस्तावेज सत्यापन की अनुमति दे दी, जो नियमों के खिलाफ है.  

सुनवाई के दौरान आयोग ने दलील दी कि राज्य आंदोलनकारियों के आश्रितों को SC/ST की तरह लाभ दिया जा सकता है, लेकिन कोर्ट इस दलील से संतुष्ट नहीं हुआ. अदालत ने स्पष्ट किया कि आरक्षण का लाभ लेने के लिए प्रमाणपत्र समय पर जमा करना जरूरी है.  

यह मामला उत्तराखंड में राज्य आंदोलनकारियों को मिले आरक्षण के क्रियान्वयन को लेकर उठे विवादों की श्रृंखला में नया अध्याय है. हाईकोर्ट का यह आदेश भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और नियमों की अनुपालन पर बड़ा असर डाल सकता है.

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