उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैण (गैरसैंण) में  विधानसभा सत्र की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) दीपम सेठ ने एक नई और सराहनीय पहल की है. अमूमन प्रोटोकॉल और अनुशासन के घेरे में रहने वाले पुलिस महकमे में आज उस वक्त एक अलग नजारा देखने को मिला, जब DGP ने सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के साथ बेहद अनौपचारिक माहौल में बैठक की.

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भराड़ीसैण की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और ठंड के बीच ड्यूटी कर रहे जवानों के बीच पहुंचकर DGP दीपम सेठ ने उनसे सीधा संवाद किया. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य केवल सुरक्षा की समीक्षा करना नहीं था, बल्कि उन जवानों की समस्याओं को समझना था जो दिन-रात मोर्चे पर डटे रहते हैं. DGP ने पुलिसकर्मियों से बहुत ही आत्मीयता से बातचीत की और ड्यूटी के दौरान उन्हें पेश आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों और चुनौतियों पर चर्चा की.

सुझावों पर चर्चा और पुलिसकर्मियों से सीधा संवाद

बैठक के दौरान जवानों ने भी खुलकर अपनी बात रखी और सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के साथ-साथ अपनी सुविधाओं को लेकर कई अहम सुझाव दिए. इस पर DGP ने कहा कि अक्सर जिलों में तैनात पुलिसकर्मियों से मुख्यालय स्तर पर सीधा संवाद नहीं हो पाता है. उन्होंने माना कि भराड़ीसैण जैसी जगहों पर पुलिसकर्मी बेहद विषम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, ऐसे में उनके मनोबल को बनाए रखना और उनकी वाजिब समस्याओं का समाधान करना विभाग की प्राथमिकता है.

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DGP बोले- संवाद ही है समाधान

मीडिया से बात करते हुए DGP दीपम सेठ ने कहा, "हमारे पुलिसकर्मी यहाँ बहुत कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं. फील्ड पर तैनात जवानों से सीधा संवाद करना जरूरी है ताकि हम जान सकें कि उन्हें किन सुधारों की जरूरत है. आज की चर्चा में कई महत्वपूर्ण सुझाव मिले हैं, जिन पर भविष्य में गंभीरता से विचार किया जाएगा."