उत्तराखंड में निहंगों से जुड़े विवाद ने अब सीधे-सीधे सियासी रूप ले लिया है. कांग्रेस ने इस मामले को कानून-व्यवस्था से जोड़कर राज्य सरकार पर तीखे सवाल दागे हैं, तो दूसरी तरफ बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए सरकार की मंशा साफ कर दी. उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता यात्रा को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है.

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कांग्रेस का आरोप- 'निहंगों के मामले में सरकार का रवैया ढीला'

उत्तराखंड कांग्रेस की प्रवक्ता सुजाता पॉल ने इस पूरे मामले में राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को सीधे लपेटे में लिया. उनका कहना था कि निहंगों के मामले में सरकार जिस तरह से नरमी दिखा रही है, उससे आम जनता के बीच डर का माहौल पैदा हो रहा है. सुजाता पॉल ने इस पर भी सवाल खड़ा किया कि जब आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, तो आखिर किस आधार पर उन्हें छोड़ दिया गया. उनका कहना था कि पूरी जांच प्रक्रिया में जिस तरह की पारदर्शिता दिखनी चाहिए थी, वह कहीं नजर नहीं आई.

कांग्रेस प्रवक्ता ने इसे लेकर डीजीपी और सरकार से सीधा जवाब मांगा है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि चुनावी साल चल रहा है और ऐसे समय में कानून-व्यवस्था के मामले में कोई भी समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर जनता के भरोसे पर पड़ता है.

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'इस तरह के संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति ठीक नहीं'- सांसद नरेश बंसल

कांग्रेस के इन आरोपों पर पलटवार करते हुए बीजेपी से राज्यसभा सांसद नरेश बंसल मैदान में उतरे. उन्होंने साफ कहा कि सरकार सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने को लेकर पूरी तरह गंभीर और प्रतिबद्ध है. बंसल के मुताबिक चारधाम यात्रा उत्तराखंड की आस्था और पहचान का अहम हिस्सा है, इसलिए सरकार किसी भी सूरत में इसका माहौल बिगड़ने नहीं देगी.

राज्यसभा सांसद ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि इस तरह के संवेदनशील मुद्दे को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनाया जाना चाहिए. उनका कहना था कि सरकार हर घटना को गंभीरता से ले रही है और जरूरत पड़ने पर उचित कार्रवाई भी की जा रही है. फिलहाल निहंग विवाद को लेकर दोनों दलों के बीच बयानबाजी का यह दौर थमने का नाम नहीं ले रहा, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी पारा और चढ़ने के आसार हैं.

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